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Monday, 25 August 2025

सांसद को मीटिंग में जाने से रोका, कार्यकर्ताओं ने की नारेबाजी, वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप से शांत हुआ मामला


रफीक खान
केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्री तथा भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के जबलपुर आगमन के दौरान यहां की राज्यसभा सांसद सुमित्रा बाल्मिक को पुलिस से काफी संघर्ष करना पड़ा। भारतीय जनता पार्टी की संभागीय बैठक के दौरान जब सुमित्रा बाल्मिक पहुंची तो उन्हें पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद कार्यकर्ता उग्र हो गए और पुलिस और नेताओं के बीच धक्का मुक्की होने लगी। इस बीच सुमित्रा बाल्मीक का चश्मा भी टूट गया। बाद में मीटिंग में पहुंचे वरिष्ठ नेताओं ने हस्तक्षेप कर मामले को शांत कराया। The MP was prevented from entering the meeting, workers raised slogans, the matter was settled with the intervention of senior leaders

जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने सांसद के साथ बेवजह धक्का-मुक्की की है। इस मामले पर सांसद सुमित्रा बाल्मिक ने मौजूद मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि मेरा चश्मा टूट गया।सुरक्षा की दृष्टि से जो गेट पर खड़े हुए थे, उनकी अपनी ड्यूटी है. वो अपनी ड्यूटी करें लेकिन हमारे जो राष्ट्रीय अध्यक्ष आए हैं, उनके साथ सबको फोटो लेना है, सेल्फी लेना है। मेरे साथ विधायक और अन्य लोग थे। हमने सुरक्षा गार्ड को बोला कि हमें चले जाने दो, लेकिन उन्होंने पूरा गेट बंद कर दिया। उनके हाथ से मेरा चश्मा टूट गया चश्मा गिरने से मुझे भी समझ नहीं आया कि अंदर जाऊ या बाहर जाऊ। उल्लेखनीय है कि दलित समाज से आने वाली राज्यसभा सांसद सुमित्रा बाल्मीकि के साथ इस तरह का बर्ताव पहली बार हुआ हो ऐसा नहीं है इसके पहले भी कई बार पुलिस उनके साथ ऐसा ही सुलूक कर चुकी है। दो साल पहले 9वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर जबलपुर में राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम हुआ था। लेकिन मंच पर राज्यसभा सांसद सुमित्रा बाल्मिक को जगह नहीं मिली थी। उन्हें पीछे बैठाया गया था, इसको लेकर उन्होंने नाराजगी जताते हुए कलेक्टर पर गंभीर आरोप लगाए थे। 2022 में राज्यसभा सदस्य सुमित्रा बाल्मिक को नगर निगम चुनाव में प्रचार के लिए बीजेपी ने सागर बुलाया। दलित वर्ग के मतदाताओं को रिझाने के मकसद से उन्होंने बुलाया गया था। इसलिए उन्हें शासकीय सत्कार के साथ सर्किट हाउस के 3 नंबर कक्ष में रुकवाया गया। इस बीच जिम्मेदार प्रशासन ने इनका सामान फेंक कर मंत्री जी को आवंटित कर दिया, यह मामला भी काफी सरगर्म हुआ था।