डर नाम की चीज नहीं, चौराहे पर सरेआम मास्टर ले रहा था घूस, मान्यता नवीनीकरण को बना लिया व्यापार - khabarupdateindia

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डर नाम की चीज नहीं, चौराहे पर सरेआम मास्टर ले रहा था घूस, मान्यता नवीनीकरण को बना लिया व्यापार


रफीक खान
पद स्कूल मास्टर। काम बच्चों को पढ़ाना लेकिन जुगाड़ लगाकर बन गए BRC यानी कि ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर। विकासखंड स्त्रोत समन्वयक। घूसखोरी का आलम यह है कि प्राइवेट स्कूलों की मान्यता नवीनीकरण को धंधा बना डाला। बेशर्मी इतनी कि चौराहे पर सरेआम ले रहे रिश्वत। आसपास के परिचितों को भी बना लिया दलाल। डर नाम की कोई चीज नहीं। इन सब हालात के बीच मध्य प्रदेश के इंदौर में लोकायुक्त पुलिस विशेष स्थापना शाखा की टीम ने एक रिश्वतखोर BRC नीरज गर्ग को कलानी चौराहे पर ₹30000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। घूसखोर इसी मामले में ₹50000 की रिश्वत पहले भी अपने दलाल के माध्यम से ले चुका था। लोकायुक्त पुलिस को इनपुट मिले हैं कि पहले भी इसके अलावा कई स्कूलों की मान्यता मामले में रिश्वतखोरी लगातार चली आ रही है। सारे मामलों की जांच की जा रही है।There is no fear, the master was openly taking bribe at the crossroads, he made renewal of recognition a business

जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि आवेदक रामविलास गुर्जर संचालक द सेंट पीटर्स कॉन्वेंट हायर सेकंडरी स्कूल, नगीन नगर ने इंदौर लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी कि स्कूल की मान्यता के नवीनीकरण के बदले नीरज गर्ग, खंड श्रोत समन्वयक (BRC) इंदौर शहर - 1, शिक्षा विभाग ने उससे 80 हजार रूपये रिश्वत की मांग की है। लोकायुक्त ने शिकायत की जांच की और शिकायत सही पाए जाने पर रिश्वतखोर BRC नीरज गर्ग को कालानी चौराहे पर 30 हजार रूपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों पकड़ा है। आवेदक रामविलास गुर्जर के मुताबिक एक दिन पहले वो रिश्वतखोर बीआरसी नीरज गर्ग के कहने पर 50 हजार रूपये की राशि पड़ोस के ओएसिस स्कूल के कर्मचारी कमल सिंह वीरजी को दे चुका है। बाकी के 30 हजार रूपये की रिश्वत देने के लिए उसे रिश्वतखोर बीआरसी नीरज गर्ग ने कालानी चौराहे पर बुलाया था। लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया है।