जबलपुर की घटना पूरे प्रदेश पर सवालिया निशान, ढेरों वारदात के बावजूद सरकार का अंकुश नहीं लग पा रहा - khabarupdateindia

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जबलपुर की घटना पूरे प्रदेश पर सवालिया निशान, ढेरों वारदात के बावजूद सरकार का अंकुश नहीं लग पा रहा


रफीक खान
मध्य प्रदेश में रेत माफिया पूरी तरह निरंकुश है। सरकार रूपी सिस्टम के साथ या फिर उसके खिलाफ या फिर मुकाबला करके उस पर भारी या खुद अपनी सल्तनत बनाकर संचालित होने वाले रेत के कारोबार पर माफिया का गहरा शिकंजा है। रेत का खूनी खेल जब तब अपना लाल कलर दिखाता है और सुर्खियों में आकर फिर दब जाता है। पटवारी से लेकर आईपीएस अधिकारियों तक की कुर्बानी, गेंगवार और रेत माफिया के आपसी खूनी संघर्ष जैसी घटनाएं भी वारदातों पर हमेशा-हमेशा के लिए रोक लगाने में नाकाम रही है। मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक बार फिर रेत का खूनी खेल सामने आया है। यहां रेत के एक कारोबारी पर पहले हत्या के प्रयास की गरज से हमला होता है, आरोपी पकड़ा जाता है, उसे सजा भी हो जाती है, वही आरोपी दोबारा मैदान में उतरता है और अबकी बार रेत के कारोबारी को गोलियों से भूनकर मौत के घाट उतार देता है। मीडिया की शैली में सनसनी और हड़कंप है लेकिन जिम्मेदार सिस्टम की हरकत हलचल के रूप में कहीं नजर नहीं आ रही।The Jabalpur incident casts a shadow over the entire state, with the government unable to control the incidents despite numerous incidents.

जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि बाइक पर जा रहे रेत कारोबारी खितौला निवासी धर्मेन्द्र सिंह ठाकुर उर्फ चिन्टू (50) को दो बदमाशों ने रोका। वह भागा तो उसका पीछा किया। एक बदमाश ने उसे पकड़कर सड़क पर पटक दिया। दूसरे ने युवक से सिर से सटाकर तीन गोलियां चला दीं। वारदात का वीडियो भी सामने आया है। वारदात खितौला थाना इलाके में बारीबहु स्टेडियम के पास दोपहर करीब एक बजे की बताई जा रही है। हमलावर जिस मोटरसाइकिल पर आए थे, उसी पर बैठकर भाग निकले। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। युवक को सिहोरा स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हत्या के बाद चकाजाम, विरोध करते हुए प्रदर्शनकारियों ने सिहोरा के बदमाश आशीष विश्वकर्मा उर्फ अस्सू पर हत्या कराने का आरोप लगाया। धर्मेंद्र की सिहोरा गौरेया मोहल्ला निवासी आशीष विश्वकर्मा उर्फ अस्सू से रंजिश थी। अस्सू ने दस साल पहले भी धर्मेन्द्र पर फायरिंग कर उसकी हत्या की को​शिश की थी।धर्मेन्द्र घायल हो गया था। उस वक्त पुलिस ने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया था। मामले में न्यायालय से अस्सू को सजा भी सुनाई थी। अस्सू चार सितम्बर की रात दोस्त सौरभ के साथ बाबाताल के पास बैठा था। तभी वहां दीपक पटेल, आजाद पटेल व एक अन्य पहुंचे। गोली लगने के कारण आशीष जख्मी हो गया था। मामले में ​खितौला पुलिस ने हत्या के प्रयास का प्रकरण दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। अस्सू ने धर्मेन्द्र पर संदेह जाहिर किया था, लेकिन धर्मेन्द्र के वारदात में शामिल होने के कोई भी सबूत पुलिस के हाथ नहीं लग सके थे। अस्सू के मन में यह आशंका थी कि धर्मेंद्र ने पुलिस को सेट कर लिया है और लगातार बदले की भावना के साथ आखिरकार उसने हत्या कर ही डाली।