रफीक खान
गरीबों के लिए मुफ्त इलाज योजना आयुष्मान भारत स्कीम के तहत मध्य प्रदेश के कुल 398 अस्पतालों में से 126 निजी अस्पतालों की फ्री इलाज की मान्यता रद्द कर दी गई है। सरकार का यह फैसला भले ही मरीज को बेहतर लाभ देने वाला हो, अस्पतालों की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से हो लेकिन उनकी परेशानी बढ़ाना लाजमी है। प्रदेश में 25% से ज्यादा अस्पताल कम होने से लाभार्थी परेशान होंगे। जबलपुर के 12 अस्पतालों की मान्यता समाप्त की गई है। Beneficiaries will face more difficulties due to the reduction of more than 25% of hospitals; 12 hospitals in Jabalpur have been removed.
जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि प्रदेश के चार शहरों में स्थित 126 निजी अस्पतालों की मान्यता खत्म की गई है। इनमें सबसे ज्यादा 51 अस्पताल भोपाल में हैं। इसके बाद इंदौर के 30, ग्वालियर के 33 और जबलपुर के 12 अस्पताल शामिल हैं। आयुष्मान भारत निरामयम ने स्पष्ट किया कि, ये कदम अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। बिना NABH सर्टिफिकेट वाले अस्पताल अब से आयुष्मान कार्ड धारकों का इलाज नहीं कर पाएंगे। ये फैसला ऐसे समय में आया है, जब आयुष्मान कार्ड पर भरोसा करने वाले लाखों गरीब, वंचित और आदिवासी परिवार इलाज की उम्मीद लगाए बैठे हैं। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में 80 प्रतिशत निजी अस्पताल इस नियम से प्रभावित होने की संभावना है। खासकर छोटे और मध्यम अस्पतालों को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा मरीजों को अब इलाज कराने के लिए बड़े अस्पताल ही जाना पड़ेगा, जहां ओवर क्राउडिंग होने की आशंका बढ़ गई है। ऐसे में लाखों मरीजों के लिए इलाज का विकल्प खासा सीमित होने की शंका है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में अबतक कुल 398 आयुष्मान योजना के तहत गरीबों का इलाज करने वाले अस्पताल थे। इनमें से 212 एंट्री लेवल पर हैं और सिर्फ 59 के पास फुल NABH सर्टिफिकेट उपलब्ध है। बिना किसी NABH प्रमाणपत्र वाले अस्पताल तुरंत योजना से बाहर किया गया है, जबकि एंट्री लेवल वाले अस्पतालों को दो साल में अपग्रेड करना होगा।
