रफीक खान
देश भर में खतरनाक और बीमार आवारा कुत्तों के हमले की बढ़ती घटनाओं से आहत सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें मौत का इंजेक्शन देने की आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है। कोर्ट ने कुत्तों की पैरवी करने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। अदालत ने यह भी कहा है कि कुत्तों के साथ क्रूरता ना की जाए लेकिन आदेश का पालन जिम्मेदार अधिकारी गंभीरता के साथ करें। राज्य सरकार जिम्मेदारी सुनिश्चित करें, वरना सीधे अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। All petitions rejected, the court said- the safety of the people is paramount, responsible people should follow it seriously, otherwise it will be considered contempt.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि खतरनाक और गंभीर रूप से बीमार आवारा कुत्तों को इंजेक्शन लगाकर मारा जा सकता है, क्योंकि लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है। 28 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने देश में आवारा कुत्तों के हमलों और मौतों पर स्वतः संज्ञान लिया। 11 अगस्त 2025 को दिल्ली-NCR से 8 हफ्ते में सभी आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में भेजने का आदेश दिया गया। इसके बाद 22 अगस्त 2025 को आदेश में बदलाव किया गया, जिसमें नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को उनके इलाके में छोड़ा जा सकता है। 7 नवंबर 2025 को पूरे देश में स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन जैसी जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश जारी किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्तों के हमलों में चोट या मौत होने पर नगर निकाय और डॉग फीडर्स दोनों जिम्मेदार हो सकते हैं। अदालत ने चेताया कि उनकी टिप्पणियों को मजाक न समझा जाए और वे जिम्मेदारी तय करने से पीछे नहीं हटेंगे। मध्य प्रदेश में आवारा कुत्तों के काटने (Dog Bite) की स्थिति बेहद गंभीर है, और विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, राज्य में हर साल ऐसे हजारों मामले दर्ज किए जाते हैं। नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) की रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश में आवारा कुत्तों की कुल संख्या 10 लाख से अधिक है। डॉग बाइट के मामलों में इंदौर सबसे आगे है। जहाँ एक वर्ष में 30,000 से ज्यादा मामले सामने आए। जबलपुर में आवारा कुत्तों की संख्या 50,000से अधिक है और हर साल 13,000 से अधिक मामले दर्ज होते हैं।
