रफीक खान
मध्य प्रदेश के एयरपोर्ट पर अमचूर को हेरोइन जैसी ड्रग बताकर एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज कर एक इंजीनियर को जेल भेज दिया गया। 57 दिन बाद फोरेंसिक जांच में सामने आया कि बैग में रखा पाउडर, जिसे मशीन ने अमचूर बताया था और जिसके आधार पर एनडीपीएस एक्ट का मुकदमा लगा दिया गया था, वह पाउडर आमचूर मसाला था। इसके बाद इंजीनियर ने हाई कोर्ट की शरण ली और हाईकोर्ट ने न्याय करते हुए 10 लाख रुपए हर्जाना देने के आदेश पारित कर दिए। The High Court ordered payment of Rs 10 lakh as compensation on the petition of the accused engineer.
जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि बेगुनाह इंजीनियर अजय सिंह को 7 मई 2010 भोपाल एयरपोर्ट पर रोका गया, सीआईएसएफ ने गांधीनगर थाना पुलिस को सूचना दी। 10 मई 2010 को बैग से मिले सैंपल जांच के लए रीजनल फॉरेंसिक लैब भेजे गए। 19 मई 2010 को आरएफएसएल ने यह कहते हुए सैंपल लौटा दिए कि एमडीईए टेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं है। बाद में सैंपल हैदराबाद की केंद्रीय लैब भेजे गए। 30 जून 2010 को केंद्रीय फॉरेंसिक लैब ने रिपोर्ट दी कि सैंपल में मादक पदार्थ नहीं है। 2 जुलाई 2010 को अजय सिंह रिहा हुए। 10 दिसंबर 2010 को विशेष अदालत ने केस बंद करने की अनुमति दी। हाई कोर्ट जबलपुर के न्यायमूर्ति दीपक खोत की एकलपीठ ने 16 वर्ष पूर्व अमचूर को हेरोइन बताने के मामले में 10 लाख हर्जाने का आदेश सुनाया है। दरअसल, दिल्ली के लिए फ्लाइट पकड़ने भोपाल एयरपोर्ट पहुंचे इंजीनियर अजय सिंह को सुरक्षा जांच के दौरान रोक एयरपोर्ट की एक्सप्लोसिव ट्रेस डिटेक्टर मशीन ने हेरोइन और अन्य ड्रग्स बताकर अलार्म दे दिया था। इसके बाद अजय पर एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया था। 57 दिन बाद फारेंसिक जांच में सामने आया कि बैग में रखा पाउडर अमचूर मसाला था।
