रफीक खान
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर की युगलपीठ ने 12 वर्षीय नितिन की हत्या के बहुचर्चित मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे संजय गुप्ता को बरी कर दिया। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल एवं न्यायमूर्ति अवनिंद्र कुमार सिंह की युगल पीठ ने सत्र न्यायालय रायसेन के 03.04.2017 के फैसले को रद्द करते हुए तल्ख टिप्पणी की - "ट्रायल कोर्ट ने मामले का ट्रैक खो दिया और हुक या क्रूक से दोषसिद्धि का निर्णय पारित किया। यह अपीलार्थी के साथ घोर अन्याय है।"
संजय गुप्ता निवासी मंडीदीप, जिला रायसेन को धारा 364, 302, 201 भादवि में दोषी ठहराकर आजीवन कारावास व कुल 17 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। अभियोजन का आरोप था कि 07.04.2015 को संजय गुप्ता ने 12 वर्षीय नितिन को घर बुलाकर हत्या की और शव बोरे में भरकर कूड़े में फेंक दिया। The police said that liquid blood was recovered from the bathroom but it was not mentioned in the Panchnama.
अपीलार्थी की ओर से अधिवक्ता आनंद कुमार शुक्ला , आशीष त्रिवेदी, प्रशांत अवस्थी एवं असीम त्रिवेदी ने पैरवी की। अधिवक्ता आनंद कुमार शुक्ला ने तर्क दिया कि लास्ट सीन गवाह साहब सिंह ने नितिन को संजय के साथ नहीं, उसके बेटे के साथ देखा था। गवाह प्रेमसिंह लोवंशी PW-5 ने बताया कि घटना दिनांक 07.04.2015 को संजय गुप्ता सुबह 8:30 से शाम 5 बजे तक आकाश फैक्ट्री में ड्यूटी पर था और रात 8 बजे से भोपाल में मालिक की बेटी की बर्थडे पार्टी में शामिल था। पुलिस ने ज्ञापन 2 माह बाद 04.06.2015 को बनाया और जब्त सामग्री FSL जांच के लिए 4-6 महीने बाद 30.10.2015 को भेजी।
हाईकोर्ट के निष्कर्ष
1. ट्रायल कोर्ट ने जिस "सेमी लिक्विड ब्लड" को संजय के बाथरूम से बरामद बताया, उसकी कोई बरामदगी 09.04.2015 के पंचनामा Ex.P-3 में दर्ज ही नहीं है।
2. बरामद स्लिपर का साइज दर्ज नहीं, खुले प्लॉट से मिली इसलिए महत्वहीन।
3. हथौड़े से चोट का मेडिकल कनेक्शन साबित नहीं, पेचकस पर फिंगर प्रिंट नहीं लिए गए।
4. गवाह साहब सिंह के बयान केस डायरी और कोर्ट में विरोधाभासी - कार से मोटरसाइकिल हो गई।
5. FSL चेन ऑफ कस्टडी टूटी, 6 महीने तक माल थाने में रखा गया।
युगल पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के शरद बिरधीचंद सारदा केस का हवाला देकर कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य में एक भी कड़ी टूटने पर दोषसिद्धि नहीं हो सकती।
