भोपाल से पकड़े गए 3 आरोपियों को अभियोजन रिकॉर्ड देखने के बाद मिली जमानत, शर्ते भी की निर्धारित - khabarupdateindia

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भोपाल से पकड़े गए 3 आरोपियों को अभियोजन रिकॉर्ड देखने के बाद मिली जमानत, शर्ते भी की निर्धारित


रफीक खान
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर ने राजधानी भोपाल से गिरफ्तार किए गए 3 आरोपियों को जमानत देते हुए शर्तोँ का निर्धारण भी किया है। साथ ही हाई कोर्ट ने ये भी टिप्पणी की है कि सिर्फ इस्लामिक साहित्य की फोटो कॉपी कहीं से बरामद होने के कारण किसी को आतंकी नहीं माना जा सकता। हाई कोर्ट ने अभियोजन पक्ष द्वारा ट्रायल कोर्ट में प्रस्तुत किए गए रिकॉर्ड का अवलोकन भी किया। Three-accused-arrested-from-Bhopal-were-granted-bail-after-reviewing-the-prosecution-records-with-conditions-also-se.

हाई कोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की संयुक्तपीठ ने एनआईए की गतिविधियों से जुड़े मामले में गिरफ्तार भोपाल के शेख जुनैद, मोहम्मद वसीम और मोहम्मद करीम की आपराधिक अपीलें मंजूर करते हुए इस मत के साथ जमानत का लाभ प्रदान कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि महज माइंडसेट’, सेमिनार में भागीदारी या इस्लामिक साहित्य की फोटोकॉपी मिलने से किसी को आतंकवादी गतिविधियों में शामिल नहीं माना जा सकता। एनआईए की ओर से दलील दी गई कि आरोपियों के खिलाफ गवाहों के बयान, अन्य आरोपियों से संबंध और जब्त इस्लामिक साहित्य उनकी कट्टर मानसिकता दर्शाता है। रिकॉर्ड देखने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपियों से कोई ठोस आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई वरन केवल कुछ फोटोकॉपी जब्त की गईं। इसके अलावा मोबाइल फोन जब्त होने के बावजूद किसी इंटरसेप्टेड कॉल या मैसेज के आधार पर गिरफ्तारी नहीं हुई। याचिकाकरताओं के किसी आतंकी साजिश या हिंसक कार्रवाई के प्रथम दृष्टया सबूत भी नहीं मिले। यूएपीए की धारा 15 के तहत आतंकी कृत्य साबित करने के लिए आवश्यक तत्व रिकॉर्ड पर नहीं हैं तो वहीं धारा 18, 18बी और 20 के तहत साजिश, भर्ती या आतंकी संगठन की सदस्यता का भी विश्वसनीय प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता। सिर्फ वैचारिक साहित्य रखना, कठोर कानूनों के तहत अपराध नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने माना कि मुकदमे के जल्द खत्म होने की संभावना नहीं है, इसलिए आरोपियों को अनिश्चितकाल जेल में नहीं रखा जा सकता। प्रत्येक आरोपी को 2 लाख का निजी मुचलका, 2 लाख के दो स्थानीय जमानती देने होंगे। साथ ही तीनों को अपने पासपोर्ट सरेंडर करना होंगे और माता-पिता और ननिहाल पक्ष के कम से कम चार-चार स्थायी पते बताने होंगे। इसके अलावा देश छोड़ने से पहले ट्रायल कोर्ट की अनुमति लेनी होगी और हर तारीख पर ट्रायल कोर्ट मेंहाईकोर्ट ने कहा कि उपस्थित होना पड़ेगा।