कटनी GRP थाने में ऐसा तांडव, TI समेत 6 पुलिस कर्मी सस्पेंड Such an orgy in Katni GRP police station, 6 policemen including TI suspended - khabarupdateindia

खबरे

Taj Diagnostic Center
★ DIGITAL X-RAY ★ SONOGRAPHY (USG) ★ CBC TEST ★ BLOOD SUGAR TEST ★ THYROID PROFILE ★ LIVER FUNCTION TEST (LFT) ★ KIDNEY FUNCTION TEST (KFT) ★ LIPID PROFILE ★ URINE TEST ★ PREGNANCY TEST ★ ECG ★ ALL ROUTINE & SPECIAL PATHOLOGY TESTS ★ हमारे यहाँ सभी प्रकार के टेस्ट कम दामो पर किये जाते है ★ आज ही संपर्क करे 9827328951, 9340621093

Thursday, 29 August 2024

कटनी GRP थाने में ऐसा तांडव, TI समेत 6 पुलिस कर्मी सस्पेंड Such an orgy in Katni GRP police station, 6 policemen including TI suspended


रफीक खान
मध्य प्रदेश के कटनी रेलवे स्टेशन पर बने जीआरपी थाने में एक दलित महिला और उसके दलित किशोर पोते के साथ की गई बेरहम मारपीट ने एक तांडव जैसा नजारा प्रस्तुत किया है। जीआरपी थाने के भीतर थाना प्रभारी अरुण बहाने द्वारा दलित महिला तथा वर्दी धारी पुलिसकर्मियों द्वारा दलित किशोर की पिटाई का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। यह वीडियो कब का है? यह तो अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है लेकिन मामले ने जबरदस्त तरीके से तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस के तमाम वरिष्ठ नेता इस वीडियो को आधार बनाकर भाजपा सरकार पर करारा प्रहार कर रहे हैं। इस सब के चलते मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देश पर डीआईजी रेल को जांच के लिए कटनी रवाना कर दिया है तथा जीआरपी थाना प्रभारी के अलावा प्रधान आरक्षक और चार आरक्षकों को सस्पेंड करने के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। मामले में और भी एजेंसियों को जांच में लगा दिया गया है। इस मामले में जिम्मेदार पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध करने की तैयारी चल रही है।

इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार कहा जाता है कि कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेट फॉर्म X पर ये वीडियो साझा करते हुए प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। वायरल वीडियो मामले पर बताया जाता है कि यह वीडियो पुराना है, जिसमे जीआरपी ने एक आरोपी दीपक वंशकार की मां और उसके बेटे को थाने में लाया था, आरोपी से पहले चोरी की रिकवरी भी हुई थी। पूर्व सीएम कमलनाथ ने इस मामले की निंदा करते हुए X पर लिखा है, मध्य प्रदेश के कटनी में जीआरपी पुलिस द्वारा एक दलित बच्चे और महिला को बेरहमी से पीटने की घटना बताती है कि मध्य प्रदेश में दलितों का जीवन सुरक्षित नहीं है। रक्षक ही उनके भक्षक बनते जा रहे हैं। इस पूरे मामले में शासकीय रेल पुलिस के जितने सुपरविजन अधिकारी है, वह भी एक तरह से कटघरे में आ गए हैं। अगर मामला पुराना है तो इस मामले पर डीएसपी से लेकर एसआरपी तक किसी ने कोई संज्ञान क्यों नहीं लिया? और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की? ताकि इस तरह की घटनाओं पर विराम लग सके।