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Sunday, 1 December 2024

किरायेदारों ने अब ज्यादा की तो होगा बड़ा नुकसान, लगेगा चार गुना रेंट, दूसरा पार्टनर नहीं रख सकेंगे


रफीक खान
मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा किराएदारी का नया मॉडल तैयार किया गया है। इस नए मॉडल के तहत किराएदार दूसरा कोई पार्टनर नहीं रख सकेगा। छोटी सी गलती पर उसे चार गुना रेंट देना होगा। कारोबारी गतिविधि के लिए 6 महीने का अग्रिम किराया अदा करना होगा। बिना अनुमति किराएदारी पर पाबंदी रहेगी और इसकी अवहेलना करने पर कार्रवाई होगी। अनुबंध के बाद खाली न करने पर चार गुना किराया देना पड़ेगा। यानी कि किरायेदारों को अब सतर्कता और समन्वय के साथ रहने की जरूरत है। मकान मालिक से किसी भी तरह का पंगा लेने की जरूरत नहीं है। If the tenants do more now, there will be huge loss, four times the rent will be charged, they will not be able to keep another partner.

ऐसा कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश शासन के मुख्य सचिव अनुराग जैन की सहमति मिलने के बाद प्रविधानों को अब नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा कैबिनेट में प्रस्तुत किया जाएगा। उधर, फायर एक्ट भी शीतकालीन सत्र में प्रस्तुत किया जा सकता है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन सहित अधिकतर नगरीय निकायों में बड़ी संख्या में आवास किराये पर दिए जाते हैं। कई बार मकान मालिक और किरायेदार के बीच किराये, मकान के संधारण और खाली कराने को लेकर विवाद होता है। मामले कोर्ट तक पहुंच जाते हैं। नई व्यवस्था के तहत बिना अनुबंध के मकान मालिक किरायेदार नहीं रख पाएंगे। निर्धारित अवधि के बाद मकान खाली करना होगा। यदि मकान खाली नहीं किया जाता है तो शिकायत पर सुनवाई करके बेदखली की कार्रवाई की जाएगी। मकान मालिक भी किरायेदार को अनावश्यक रूप से तंग नहीं कर सकेगा। आवश्यक सेवाओं को बाधित करने पर मालिक के विरुद्ध कार्रवाई होगी। किरायेदार अनुबंध के अनुसार बढ़ा हुआ किराया देने से इन्कार करता है तो इसकी शिकायत किराया अधिकरण में की जा सकेगी। युद्ध, बाढ़, सूखा, तूफान, भूकंप या कोई अन्य प्राकृतिक आपदा की स्थिति है तो अवधि समाप्त होने पर भी किरायेदार से मकान खाली नहीं कराया जाएगा पर उसे अनुबंध के अनुसार किराया देना होगा। किरायेदार की मृत्यु होने पर उसके उत्तराधिकारी को रहने का अधिकार होगा पर उसे भी अनुबंध का पालन करना होगा। मकान किराये पर देने के बाद मकान मालिक को यह अधिकार नहीं रहेगा कि वह कभी भी परिसर में प्रवेश करे।मकान में मरम्मत या अन्य कार्य करवाने, निरीक्षण या अन्य किसी कारण से प्रवेश करना है तो कम से कम चौबीस घंटे पहले सूचना देनी होगी। किराया प्राधिकारी नियुक्त होगा, जो डिप्टी कलेक्टर से कम स्तर का नहीं होगा।- प्रत्येक जिले में जिला अथवा अपर जिला न्यायाधीश को किराया अधिकरण नियुक्त किया जाएगा। इन्हें साठ दिन के भीतर आवेदन का निराकरण करना होगा।