रफीक खान
दिल्ली हाई कोर्ट में पदस्थापना के दौरान शासकीय आवास में लगी कथित आग और जले नोटों के जखीरे के मामले में जस्टिस यशवंत वर्मा जांच समिति के सामने संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। उनसे कई प्रश्न किए गए लेकिन ज्यादातर मामले में उनका रवैया गोलमोल और टरकाने वाला रहा। संसद में पेश हुई जांच समिति की रिपोर्ट में उल्लेखित है कि जस्टिस वर्मा यह नहीं बता पाए की नोट कहां से आए? 200 पेज की इस रिपोर्ट के आधार पर अब आगे की कार्रवाई सदन ही तय करेगा। They could not explain to the inquiry committee where the currency notes came from; the report has been tabled in Parliament, and the House will decide on the further course of action.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कहा जाता है कि संसद में पेश हुई जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा अपने आधिकारिक आवास के स्टोर रूम में मिले भारी मात्रा में 500 रुपये के नोटों के स्रोत और स्वामित्व का संतोषजनक स्पष्टीकरण देने में असफल रहे। समिति ने उनके रुख को टालमटोल वाला माना और उन पर लगे तीनों आरोपों को सही पाया।कमेटी ने पाया कि घटनास्थल और स्टोर रूम के साक्ष्यों को ठीक से सुरक्षित नहीं रखा गया तथा उनकी स्थिति में बदलाव किए गए। जस्टिस वर्मा का रवैया जांच के दौरान टालमटोल वाला और अस्पष्ट रहा, जिसके चलते समिति ने उनके स्पष्टीकरण को खारिज कर दिया। उल्लेखनीय है कि घर में बड़ी मात्रा में बेहिसाब कैश मिला। जांच समिति ने पाया कि जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के स्टोर रूम में ₹500 के नोटों के बंडल और अधजले नोट मिले थे। जांच समिति ने कहा कि जस्टिस वर्मा के जवाब में स्पष्टता, पारदर्शिता और संस्थागत जिम्मेदारी का भाव नहीं दिखा।
