15 लाख भुगतान के बदले ठेकेदार से मांग रहा था 12% रिश्वत, लोकायुक्त पुलिस ने किया रंगे हाथों गिरफ्तार - khabarupdateindia

खबरे


Friday, 25 September 2026

15 लाख भुगतान के बदले ठेकेदार से मांग रहा था 12% रिश्वत, लोकायुक्त पुलिस ने किया रंगे हाथों गिरफ्तार


रफीक खान
मध्य प्रदेश के मंडला में पदस्थ मुख्य नगर पालिका अधिकारी गजानन नाफड़े को लोकायुक्त पुलिस की टीम ने शुक्रवार को ₹200000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। लोकायुक्त पुलिस की टीम ने यह कार्रवाई ऐन गजानन विसर्जन के दिन की, जो महज एक इत्तेफाक है। रिश्वतखोर नगर पालिका अधिकारी ठेकेदार के भुगतान के बदले 12% कमीशन की मांग करते हुए लगातार परेशान कर रहा था। जबलपुर से मंडला गई टीम उसके आवास तथा ऑफिस से महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बरामद कर रही है। जांच- पड़ताल का क्रम जारी है। Demanding a 12% bribe from a contractor in exchange for a payment of ₹15 lakh, the individual was arrested red-handed by the Lokayukta police.

इस संबंध में जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि जबलपुर निवासी आवेदक ज्ञानचंद बेन ने लोकायुक्त पुलिस को शिकायत की थी कि मैं तथा मेरी पत्नी मंजू बैन दोनों शासकीय पंजीकृत ठेकेदार हैं। मेरी पत्नी के नाम से एम एस पलक बैन फर्म रजिस्टर्ड है। जिसे मंडला नगर पालिका के द्वारा वर्ष 24- 25 तथा 25 -26 एल ई डी लाइट एवं फिटकरी के सप्लाई का ठेका प्राप्त हुआ था। जिसमें मुझे पाइप जॉइंट एवं वाटर कूलर सप्लाई का कार्य करना है। मेरी पत्नी के कार्य का 392300 रुपए का भुगतान हो गया था। जब मैं अपने कार्य का 15 लाख भुगतान के लिए नगर पालिका सीएमओ गजानन नाफड़े से मिला तो उन्होंने कहा तुम्हारी पत्नी के कार्य के भुगतान का 12% मुझे रिश्वत के रूप मैं चाहिए तब मैं तुम्हारे 15 लाख रुपए का भुगतान करूंगा। मुख्य नगर पालिका अधिकारी गजानन नाफड़े द्वारा मेरे कार्य के भुगतान करने के एवज में मेरी पत्नी के कार्य के भुगतान का 12 प्रतिशत के हिसाब से रिश्वत की मांग की जा रही थी। जिसकी शिकायत आवेदक द्वारा लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय जबलपुर में की। शिकायत सत्यापन के दौरान आरोपी सीएमओ नगर पालिका मंडला गजानन नाफड़े ₹200000 रिश्वत लेने के लिए तैयार हो गए है। 25 सितंबर को आरोपी गजानन नाफड़े को 200000 रुपए की रिश्वती राशि लेते हुए परिषद ऑफिस में रंगे हाथ दबोचा गया । आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशो.)2018 की धारा-7,13(1)B,13(2) के अंतर्गत कार्यवाही की जा रही है।