रफीक खान
उत्तर प्रदेश के एक जज साहब का सख्त रुख सामने आया है। उन्होंने लगभग 100 दिनों में 22 लोगों को फांसी की सजा सुना डाली। लगातार सजा-ए-मौत के ऑर्डर के बाद जिम्मेदारों ने दखल दी और जज साहब से इस तरह की करीब 100 फाइलें ले ली गई। हालांकि जज साहब अपने आदेशों को लेकर बहुत उत्साहित और दृढ़ संकल्पित हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि जब तक भी जिंदा है, किसी के सामने झुकेंगे नहीं। वह खुद को कायर कहलाने वालों की सूची में शामिल नहीं करेंगे। जब तक उनके पास कुर्सी है, तब तक फैसलों पर सिर्फ उनका ही अधिकार होगा। Those in charge intervened following the judge's stern stance; meanwhile, the judge declared, "As long as I am alive, I will not bow before anyone."
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कहा जाता है कि मुजफ्फरनगर जिला कोर्ट के जज रवि कुमार दिवाकर ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वे माफिया, बाहुबलियों या अपराधियों के दबाव में झुकने और कायर कहलाने के बजाय मरना ज्यादा पसंद करेंगे। उन्होंने कहा कि वह सिर्फ भगवान से डरते हैं और यह उनके माता-पिता ने सिखाया है। जज रवि कुमार का यह बयान दहेज हत्या के एक मामले में फैसला सुनाते समय आया, इसमें उन्होंने 7 सितंबर को एक व्यक्ति को मौत की सजा सुनाई थी। मुजफ्फरनगर के जज रवि कुमार दिवाकर ने लिखा, “अगर मैं दूसरी ताकतों से डरने लगूं तो मेरे लिए इस पवित्र न्यायिक संस्थान से इस्तीफा देना ही सही होगा। मैं मरना पसंद करूंगा, लेकिन कायर जज नहीं कहलाना चाहूंगा। जब तक मैं अपने सिद्धांतों का पालन कर सकता हूं, मैं अपनी सेवा जारी रखूंगा, जब तक मैं जज की कुर्सी पर हूं, फैसले लेने का अधिकार सिर्फ मेरा ही होगा।” मुजफ्फरनगर के जिला और सेशन जज के 18 अगस्त के एक प्रशासनिक आदेश से पता चला कि जज रवि कुमार के पास लंबित हत्या के 97 केस हाल ही में दूसरे जज को ट्रांसफर कर दिए गए। जज रवि ने पिछले चार महीने में 10 केसों में 22 लोगों को मौत की सजा सुनाई थी। एडिशनल जिला और सेशन जज (FTC-3) रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट से वापस लिया गया है। बीएनएस की धारा 407 से 412 के तहत सेशंस कोर्ट द्वारा सुनाई गई किसी भी मौत की सजा पर तब तक अमल नहीं किया जा सकता जब तक कि हाईकोर्ट उसे मंजूरी न दे दे, इसलिए मुजफ्फरनगर ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई मौत की सभी सजाओं को मंजूरी के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजा जाएगा। साथ ही दोषी जो अपीलें अलग से दायर करेंगे, उन पर भी विचार किया जाएगा।
