रफीक खान
मध्य प्रदेश के जबलपुर और नरसिंहपुर जिले में अवैध रेत के धंधे की रंजिश तथा एक डॉक्टर से एमएलसी के विवाद के चलते 5 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। अपने तरह की एक अलग आपराधिक साजिश के तहत दो हाईवे के माध्यम से इन्हें कुचलकर एक्सीडेंट का रूप देने की कोशिश की गई। पांच युवकों की मौत के बाद मृतकों के समर्थकों द्वारा काफी हंगामा किया गया। नेशनल हाईवे पर विरोध प्रदर्शन में हत्या का आरोप लगाया गया था। पुलिस जांच में घटना स्थल से टाटा हाईवा का "ए" बरामद होने और फिर उसे वहां के मिल जाने के बाद पूरे मामले का खुलासा हो गया। नरसिंहपुर पुलिस ने बहुत मेहनत और हिकमत के साथ इस हत्याकांड की गुत्थी पूरी तरह सुलझाकर साफ कर दी। मामले में एक डॉक्टर सहित आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि तीन फरार आरोपियों की तलाश जारी है। Assault preceded the running-over incident—stemming from a feud over illegal sand mining and an MLC case; 8 arrested, including a doctor from Jabalpur.
शनिवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नरसिंहपुर पुलिस अधीक्षक दो ऋषिकेश मीणा के नेतृत्व में अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम ने इस पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया। पत्रकारों को बताया गया कि घटना वाले दिन शाम करीब 5 से 6 बजे हाथीनाला क्षेत्र में आरोपियों और मृतकों के बीच मारपीट हुई थी। इसके बाद रात करीब 8 बजे राष्ट्रीय राजमार्ग पर साजिश के तहत दो हाईवा वाहनों की मदद से युवकों को निशाना बनाया गया। एसपी ऋषिकेश मीणा के अनुसार मुख्य आरोपी आनंद राजपूत और राजेंद्र लोधी के बीच पुराने विवाद, अवैध रेत कारोबार तथा आपराधिक गतिविधियों को लेकर रंजिश थी। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने अलग-अलग स्थानों पर चार लोगों को निगरानी के लिए तैनात किया था और दो हाईवा वाहनों के जरिए वारदात को अंजाम दिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि डॉक्टर अमित खरे और मृतक राजेंद्र लोधी के बीच पैसों और कथित एमएलसी (मेडिको-लीगल केस) को लेकर विवाद था। आरोप है कि राजेंद्र लोधी डॉक्टर को ब्लैकमेल करता था। इसी विवाद के बाद डॉक्टर ने आनंद राजपूत से संपर्क किया और साजिश आकार लेने लगी। पुलिस ने मामले में राजा पटेल, अनुज ठाकुर, आनंद लोधी, भारत सिंह, अनिल पटेल, अरविंद्र लोधी, नरेंद्र सिंह और डॉक्टर अमित खरे को गिरफ्तार किया है। वहीं अनिल, ऋतुराज और प्रीतम फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।
क्या था मामला?
19 जुलाई की रात इंद्रानगर के पास हाईवा की टक्कर से सड़क किनारे खड़े 6-7 युवक उसकी चपेट में आ गए। घटना में राजेंद्र पटेल की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार अन्य युवकों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। एक घायल का अस्पताल में इलाज जारी है। घटनास्थल की जांच के दौरान पुलिस को सड़क पर अंग्रेजी अक्षर 'A' का टूटा हुआ मोनोग्राम मिला। यही छोटा-सा टुकड़ा जांच का सबसे अहम सुराग साबित हुआ। पुलिस को संदेह हुआ कि यह टाटा कंपनी के वाहन का हिस्सा हो सकता है। इसके बाद पुलिस टीमों ने शाहपुरा, जबलपुर और घटनास्थल से जुड़े हाईवे के विभिन्न चौराहों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर घंटों की जांच के बाद पुलिस उस वाहन तक पहुंच गई, जिसका इस्तेमाल वारदात में किया गया था।
