रफीक खान
मध्य प्रदेश में मुख्य सचिव के रूप में अशोक वर्णवाल को जिम्मेदारी दिए जाने के बाद अब नए डीजीपी के लिए चयन की तैयारी तेज हो गई है। इस प्रक्रिया के लिए बनाए गए पैनल में 11 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को शामिल किया गया है। इनमें तीन नाम पर खास फोकस है। वरुण कपूर के अलावा प्रज्ञाऋचा श्रीवास्तव तथा उपेंद्र जैन के नाम पर ज्यादा विचार होने की संभावना है। इनमें भी प्रज्ञा रिचा तथा उपेंद्र जैन के बीच ज्यादा टक्कर रहेगी, ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है। Focus intensifies on Varun Kapoor, Pragya Richa, and Upendra Jain; preparations underway for major decisions following the CS appointment.
जानकारी के मुताबिक कहां जाता है कि पुलिस मुख्यालय ने जेल डीजी वरुण कपूर, होमगार्ड डीजी प्रज्ञा ऋचा एवं ईओडब्ल्यू डीजी उपेंद्र जैन समेत 11 आइपीएस के नामों का एक प्रस्ताव गृह विभाग को भेज दिया है। ये सभी नाम मप्र आइपीएस कैडर में वरिष्ठता क्रम से लिए हैं। इन नामों में ज्यादातर स्पेशल डीजी रैंक के अधिकारी है। अब गृह विभाग द्वारा भेजे गए प्रस्ताव की जांच की जाएगी और उसे तय 12 कॉलम के फॉर्मेंट में पूरी जानकारी के साथ यूपीएससी को भेजा जाएगा। यहां यूपीएससी तीन नाम तय करेगा। इन्हीं में से एक नाम पर नए डीजी के रूप में मुहर लगाई जाएगी। बता दें कि मौजूदा डीजीपी कैलाश मकवाणा का कार्यकाल नवंबर 2026 में समाप्त हो रहा है। 11 नामों के पैनल में 1991 बैच के वरुण कपूर, प्रज्ञा ऋचा और उपेंद्र जैन का नाम है। वहीं साल 1992 बैच के पंकज श्रीवास्तव, आदर्श कटियार, जी अखेतो सेमा और 1993 बैच के अनिल कुमार, रवि गुप्ता के साथ 1994 बैच के अनंत सिंह, मनमीत सिंह नारंग, राजाबाबू सिंह और डीजी गुप्ता का नाम शामिल है। राज्य सरकार द्वारा वरिष्ठ आइपीएस अधिकारियों का वरिष्ठता, सेवा रिकॉर्ड, अनुभव और शेष सेवा अवधि के मापदंड़ों पर पैनल तैयार कर यूपीएससी को भेजा जाता है। जहां यूपीएससी की इंपैनलमैंट कमेटी स्क्रूटनी करती है। इसमें सेवाकाल की अवधि, सेवा रिकॉर्ड, विभिन्न क्षेत्रों का अनुभव सहित सामान्य नियम के तहत अधिकारी के पास कम से कम 6 माह की शेष सेवा अवधि भी महत्वपूर्ण है। इस आधार पर तीन अधिकारियों का चयन कर पैनल राज्य सरकार के भेजा जाता है। राज्य सरकार इन तीन में से एक अधिकारी को डीजीपी नियुक्त करती है। अंतिम चयन का अधिकार राज्य सरकार के पास रहता है लेकिन चयन यूपीएससी द्वारा तैयार पैनल में से ही होना चाहिए। नियुक्त डीजीपी का न्यूनतम कार्यकाल दो साल का होना चाहिए भले ही उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख उससे पहले क्यों न आती हो।
