हिसाब-किताब में व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी, हाईकोर्ट ने वक्फ बोर्ड को दिए निर्देश, 60 दिन में अभ्यावेदन करो निराकृत - khabarupdateindia

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Sunday, 12 July 2026

हिसाब-किताब में व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी, हाईकोर्ट ने वक्फ बोर्ड को दिए निर्देश, 60 दिन में अभ्यावेदन करो निराकृत


रफीक खान
मध्य प्रदेश के जबलपुर में जामा मस्जिद सदर में आर्थिक अनियमिताओं का मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है। 15000 आबादी वाली सदर की मुस्लिम समाज के लिए यह बहुत ही शर्मनाक बात है कि अल्लाह के घर का यह मामला मस्जिद में नहीं निपटाया जा सका। साल भर से ज्यादा समय से प्रबंधन कमेटी को आर्थिक अनियमितताओं, हिसाब-किताब में गड़बड़ी पर चेताया जाता रहा। जवाब मांगा जाता रहा लेकिन उसने कोई ध्यान नहीं दिया। हाईकोर्ट ने इस मामले में शिकायतकर्ता को अभ्यावेदन प्रस्तुत करने के लिए 15 दिन और वक्फ बोर्ड को उसे अभ्यावेदन के निराकरण के लिए 60 दिन का समय प्रदान किया है। Widespread irregularities in accounts; High Court directs Waqf Board to resolve the representation within 60 days.

जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि जबलपुर सदर निवासी मोहम्मद इदरीश और राजा ने हाई कोर्ट में प्रस्तुत याचिका में आरोप लगाया कि जामा मस्जिद सदर बाजार की वक्फ संपत्तियों व आय के प्रबंधन में अनियमितताएं हुई हैं। मस्जिद संपत्तियों में 47 दुकान हैं। प्रतिमाह 67000 से अधिक किराया आता है। इसके अलावा मस्जिद में जुम्मा के दिन होने वाले से करीब 40 हजार रुपए प्रतिमाह डोनेशन प्राप्त होता है। इसके अलावा मस्जिद के कमरों को भी कार्यक्रम, आयोजनों के लिए किराए पर दिया जाता है, इस सब आय का कोई भी स्पष्ट लेखा-जोखा नहीं है और ऐतराज़ के बाद उससे कई तरह से फेर बदल कर प्रस्तुत करने की जो कोशिश की गई। इससे गड़बड़झाला पूरी तरह साबित हो चुका है। साथ ही वक्फ अधिनियम, 1995 की धाराओं 64, 65 और 67 के तहत कार्रवाई व एफआइआर दर्ज कराने की मांग भी की गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान वक्फ बोर्ड की ओर से कहा गया कि अभ्यावेदन पर नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा। वहीं एफआइआर संबंधी मांग पर हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के पास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 175(3) अथवा निजी परिवाद का वैधानिक विकल्प उपलब्ध है। न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने मोहम्मद इदरीस बनाम राज्य एवं अन्य याचिका का निराकरण करते हुए मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिया है कि यदि याचिकाकर्ता 15 दिन के भीतर नया अभ्यावेदन प्रस्तुत करता है तो उस पर 60 दिन के भीतर कारणयुक्त व विधि सम्मत आदेश पारित किया जाए। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्तामुख्तार अहमद ने पैरवी की, जबकि राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता मुकुंद अग्रवाल व वक्फ बोर्ड की ओर से अधिवक्ता उत्कर्ष अग्रवाल उपस्थित रहे।