राशि न जमा किए जाने पर पेंशन से कटौती की चेतावनी भी दी, SP ने सही किया या गलत?अदालत करेगी फैसला - khabarupdateindia

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Wednesday, 5 August 2026

राशि न जमा किए जाने पर पेंशन से कटौती की चेतावनी भी दी, SP ने सही किया या गलत?अदालत करेगी फैसला


रफीक खान
मध्य प्रदेश में पुलिस महा निरीक्षक के पद से रिटायर हुए डॉ महेंद्र सिंह सिकरवार पर 11 लाख 65 हजार रुपए की वसूली मामले में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने रोक लगा दी है। यह मामला रीवा जिले के पुलिस अधीक्षक द्वारा अप्रैल 2026 में जारी किए गए आदेश से जुड़ा हुआ है। पुलिस अधीक्षक द्वारा रिटायर हो चुके रीवा जोन के ही महा निरीक्षक पर न सिर्फ वसूली का आदेश दिया बल्कि चेतावनी भी दी कि अगर उन्होंने यह राशि समय पर जमा नहीं की तो पेंशन से कटौती कर ली जाएगी। यह राशि वर्ष 2012 में उनके वेतन निर्धारण के समायोजन और एरियर्स के रूप में दी गई थी। A warning was also issued regarding pension deductions if the amount was not deposited; did the SP act rightly or wrongly? The court will decide.

जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि वर्ष 2012 में उनसे कनिष्ठ (जूनियर) आईपीएस अधिकारियों को डॉ. सिकरवार से अधिक वेतन मिल रहा था। इस विसंगति को दूर करने के लिए डॉ. सिकरवार ने अपने नियोक्ता को अभ्यावेदन दिया था। जिसके आधार पर उनके वेतन का समतुल्य निर्धारण किया गया था और नियमानुसार एरियर्स का भुगतान हुआ था। डॉ. महेंद्र सिंह सिकरवार ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से कैट जबलपुर के समक्ष याचिका दायर कर वसूली पर रोक लगाने की मांग की। याचिका में तर्क दिया गया कि डॉ. सिकरवार भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी रहे हैं, जिनके नियोक्ता केंद्र सरकार (गृह मंत्रालय) हैं, न कि मध्य प्रदेश शासन या एसपी रीवा। ऐसे में एसपी रीवा द्वारा ऐसा आदेश जारी करना उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर और गैर-कानूनी है। सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निदेशों के अनुसार, सेवानिवृत्त अधिकारियों से इस प्रकार की वसूली नहीं की जा सकती-विशेषकर तब जब अधिकारी ने वेतन निर्धारण में कोई गलत जानकारी न दी हो। एसपी रीवा द्वारा जारी पत्र में भी कहीं इस बात का उल्लेख नहीं है कि डॉ. सिकरवार ने किसी प्रकार का तथ्य छिपाया या गलत जानकारी दी थी। CAT ने प्रथम दृष्टि या मन की आईजी स्तर के अधिकारी रह चुके फरियादी के खिलाफ पुलिस अधीक्षक कैसे आदेश जारी कर सकता है? सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के प्रोसिडिंग ऑफिसर्स ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार तथा पुलिस अधीक्षक रीवा को नोटिस जारी का जवाब तलब किया है।