विजय शाह के खिलाफ केस चलेगा या नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने कहा- राज्यपाल को फैसला लेना दें, अभी दखल नहीं - khabarupdateindia

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Monday, 31 August 2026

विजय शाह के खिलाफ केस चलेगा या नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने कहा- राज्यपाल को फैसला लेना दें, अभी दखल नहीं


रफीक खान
मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मिनिस्टर कुंअर विजय शाह द्वारा कर्नल सोफिया कुरैशी को कथित तौर पर आतंकवादियों की बहन कहने के विवादित बयान मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल को फैसला लेने दें.. कहते हुए दखल देने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से ही होना चाहिए और राज्यपाल के पास अभियोजन की मंजूरी संबंधी मामला विचाराधीन है। मध्य प्रदेश सरकार की कैबिनेट द्वारा अभियोजन को ना मंजूर करने वाला प्रस्ताव राज्यपाल के समक्ष भेजा गया है। Will the case against Vijay Shah proceed? Supreme Court says: Let the Governor decide; no interference for now.

जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि गौरतलब है कि मई 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान एक प्रेस ब्रीफिंग का हिस्सा रहीं सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर मंत्री विजय शाह ने एक सार्वजनिक मंच से आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था। इस बयान के तूल पकड़ने और चौतरफा तीखी आलोचना होने के बाद यह पूरा मामला कानूनी संघर्ष में बदल गया था। मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कुंवर विजय शाह द्वारा कर्नल सोफिया कुरैशी के संबंध में की गई विवादित और अमर्यादित टिप्पणी के मामले में सोमवार को उच्चतम न्यायालय में सुनवाई हुई। अदालत में सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश पुलिस के विशेष जांच दल (SIT) ने स्पष्ट किया कि इस प्रकरण से जुड़ी गहन जांच पूरी की जा चुकी है और जांच रिपोर्ट को एक सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया है। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की विशेष पीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई संपन्न हुई। एसआईटी की ओर से पक्ष रखते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने अदालत को जानकारी दी कि आरोपी मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने (अभियोजन स्वीकृति) के संबंध में राज्य सरकार द्वारा भेजी गई सिफारिश वर्तमान में राज्यपाल के स्तर पर विचाराधीन है, जिस पर अंतिम निर्णय लिया जाना अभी शेष है। इस कानूनी स्थिति पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्यपाल को इस विषय पर अपने स्तर से निर्णय लेने दिया जाए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भी इस बात को रेखांकित किया कि जांच रिपोर्ट को नियमों के तहत सक्षम प्राधिकारी के पास जाना ही होता है। सुनवाई के दौरान मंत्री विजय शाह की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने अदालत का ध्यान इस बात की ओर आकर्षित किया कि मंत्री ने अपने विवादित बयान के ठीक अगले ही दिन सार्वजनिक रूप से अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांग ली थी। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि इस सार्वजनिक माफीनामे को भी आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जाए।