वक्फ संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने का कौन कर रहा है खेल? दुकानदार कर रहे हैं गुंडागर्दी या जिम्मेदारों की सहमति? - khabarupdateindia

खबरे


Friday, 25 September 2026

वक्फ संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने का कौन कर रहा है खेल? दुकानदार कर रहे हैं गुंडागर्दी या जिम्मेदारों की सहमति?


रफीक खान
मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में सबसे सघन इलाके में स्थित गलगला कब्रिस्तान के वजूद पर संकट खड़ा हो गया है। कब्रिस्तान के रोड फेसिंग साइट पर मात्र 80-80 फुट की दुकानों को बड़ा करने के लिए कब्रों को उखाड़ा जा रहा है। गुमटीनुमा दुकान बड़ा रूप ले रही है। वर्षों से टीन शेड वाली दुकानें अब दो मंजिला इमारत में तब्दील हो रही हैं। यह सब दुकानदारों की संगठित गुंडागर्दी है या फिर जिम्मेदारों की मिलीभगत? यह समझ से परे है। वक्फ प्रबंधन कमेटी की सहमति है या फिर वह दुकानदारों के सामने लाचार हो रही है। समाज की जिम्मेदारों को जानकारी है या नहीं या फिर सबने मूकसहमति दे दी है। बहरहाल इस मामले में जल्द ही जिला प्रशासन बड़ा हस्तक्षेप करने वाला है। Who is playing the game of misappropriating Waqf property? Is it the shopkeepers engaging in hooliganism, or do the authorities in charge consent to it?

जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि गुरंदी और मुकादमगंज के बीचों-बीच स्थित गलगला में करीब डेड एकड़ भूमि पर वर्षों पुराना कब्रिस्तान है। कब्रिस्तान की इस भूमि पर एक धार्मिक स्थल, एक पुलिस चौकी और गुरंदी का पान बाजार पहले ही बन चुका है। गलगला से बड़ी ओमती की ओर जाने वाले मार्ग पर करीब दो दर्जन दुकानें टीन शेड वाली बनाई गई थी। जिनका साइज 8 * 10 यानी की 80 वर्ग फुट क्षेत्रफल का था। इसके अलावा पूरी जमीन पर क़ब्र बनी हुई है। अब दुकानों का साइज अचानक बढ़ने लगा है। 10 फुट की जगह गहराई 30 फीट तक की जा रही है। दुर्गा मंदिर के बाजू से दुर्गा स्वीट्स दुर्गा सेव भंडार में दो मंजिला छत डाल दी गई है। जानकारों का कहना है कि दुकानों की साइज बढ़ाने के लिए कब्रों को उखाड़ दिया गया है। मलबे में जब हड्डियां निकली तो चर्चाएं सरगर्म हो गई। भाजपा के नेताओं तक बात पहुंची तो और हड़कंप मच गया। भारतीय जनता पार्टी में अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष रहे आजाद अली पहले ही गलगला कब्रिस्तान का मामला हाईकोर्ट ले जा चुके हैं, जबकि भारतीय जनता युवा मोर्चा के नेता मुईन खान ने वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष तथा कलेक्टर जबलपुर को शिकायत कर दी है। मुईन खान इस मामले का संपूर्ण ब्यौरा जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचा कर जांच करने की मांग करेंगे। उनका कहना है कि जमीन का कुल रकबा वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड में दर्ज है। जो भी प्रबंध कार्यकारिणी आई, उन्होंने कभी भी इस जमीन का ना तो सीमांकन कराया और ना ही अतिक्रमणों को चुनौती दी, ऐसा आखिर क्यों हुआ? प्रबंध कार्यकारिणी के सामने क्या मजबूरी रही? या फिर शासन और प्रशासन ने उनकी बात को अनसुना कर दिया? अगर सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी तो आगे क्या कार्रवाई की गई? वक्फ बोर्ड या वक्फ ट्रिब्यूनल में इस तरह के मामले को चुनौती दी गई या नहीं? इस तरह की कई सवाल चर्चाओं में है।