रफीक खान
मध्य प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री की लंबे समय तक विधानसभा रहे बुधनी इलाके के 35 गांवों के आदिवासियों ने भोपाल कूच कर दिया है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान उनकी मांगों के समर्थन में धरने पर बैठकर खुद हुँकार भर चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान भी धरने पर बैठकर किसानों की मांग को बुलंद करते चले आ रहे हैं। आदिवासी किसान अपनी मांगों पर अडिग है और सीहोर से भोपाल के लिए रवाना हो गए हैं। आदिवासी किसान सीधे मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से मुलाकात करने का मन बनाए हुए हैं। A former Chief Minister and current Union Minister has himself sat on a *dharna* (protest sit-in), launching a direct attack on the state government.
जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि वन विकास निगम द्वारा सीहोर जिला अंतर्गत बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कुसमी गांव निवासी 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के बाद न सिर्फ विरोध पनपा बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के समर्थन से सियासत भी गरमा गई। खड़ी फसलों को नष्ट कर दिया गया। कुएं को मिट्टी से पूर दिया गया। वन विभाग का दावा है कि यह कब्जा अवैध वन भूमि पर था, जबकि आदिवासी परिवारों का कहना है कि वह सालों से यहां निवास कर रहे हैं। वन विभाग उनके साथ अन्याय कर रहा है। खिवनी अभ्यारण की आड़ में 35 गांव के किसानों को खेती से रोका जा रहा है। कुल मिलाकर वर्तमान मध्य प्रदेश सरकार ने उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का इस मामले में अब आगे क्या रुख होगा? यह तो शाम तक ही सामने आ पाएगा।
