रफीक खान
मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में शहपुरा थाना अंतर्गत स्थित एक ट्राफिक पॉइंट पर थाना प्रभारी और हवलदार के बीच जमकर झगड़े की खबर है। इस घटना में फोन से शुरू हुई बहस बाजी के बाद हवलदार को थाना प्रभारी द्वारा अन्य पुलिस कर्मियों के साथ मिलकर जमकर पीट डाला। पीड़ित हवलदार ने मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर की। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने इस मामले में एसडीओपी पाटन को जांच के निर्देश दिए हैं। Allegations of assault on a driver and other police personnel; uniform torn; complaint filed with the ASP.
इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार कहा जाता है कि शाहपुरा थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक लखन निषाद को तेल डिपो चौराहे पर ट्रैफिक के लिए लगाया गया था। इस दौरान भारी वाहनों की बड़ी लंबी लाइन लग गई और भोपाल की ओर जाने वाला एक वाहन चालक जिद करने लगा। प्रधान आरक्षक लखन निषाद द्वारा उसे अनुमति देने में असमर्थता व्यक्त की गई। ज्यादा दबाव बनने की स्थिति में थाना प्रभारी प्रवीण धुर्वे का मोबाइल नंबर दे दिया। बात यहीं बिगड़ गई। जैसे ही वाहन चालक ने थाना प्रभारी को कॉल किया, वह भड़क उठे कि आखिर तुम्हें नंबर कहां से मिला? जब उसने बताया कि पुलिसकर्मी लखन द्वारा यह नंबर दिया गया है तो थाना प्रभारी प्रवीण धुर्वे ने लखन को फोन पर ही गाली गलौज शुरू कर दी। आवेश में आकर थाना प्रभारी प्रवीण धुर्वे अपने चालक राहुल गुप्ता व अन्य पुलिस कर्मियों के साथ मौके पर पहुंच गए और वहां फिर जमकर हंगामा हुआ। पीड़ित पुलिसकर्मी लखन निषाद ने एसपी ऑफिस पहुंचकर एडिशनल एसपी अंजना तिवारी को एक लिखित शिकायत दी है तथा उसमें कहा गया है कि उसके साथ मारपीट की गई है। वर्दी फाड़ी गई है। इस पूरे मामले को जांच में ले लिया गया है हालांकि शुरुआती तौर पर थाना प्रभारी से लेकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंजना तिवारी तक मारपीट की घटना को खारिज कर रहे हैं। बड़ा सवाल यह है कि अगर सब कुछ सामान्य होता तो प्रधान आरक्षक शाहपुरा से लिखित शिकायत लेकर एसपी ऑफिस क्यों पहुंचता? और अपने चोटों के निशान क्यों दिखाता? वरिष्ठ अधिकारियों को चाहिए कि वह इस तरह के विवादों को बजाय दबाने के निष्पक्ष जांच करें और दोषियों को दंडित कर विभाग का अनुशासन कायम रखें।
