रफीक खान
मध्य प्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी रमेश थेटे को महाराष्ट्र के नागपुर से गुरुवार की सुबह भोपाल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। रमेश थेटे राजधानी भोपाल की कोर्ट से जारी कई समन और वारंट के बावजूद लगातार फरार चल रहे थे। कोर्ट ने उन्हें स्थाई वारंट जारी करते हुए फरार भी घोषित कर दिया था। भोपाल पुलिस को जैसे ही जानकारी मिली तो महाराष्ट्र पुलिस की मदद से नागपुर की बेलत्तरोड़ी थाना अंतर्गत मनीष नगर इलाके से उनकी गिरफ्तारी की गई तथा न्यायिक दंडाधिकारी कल्पना कोतवाल की अदालत में गुरुवार की शाम पेश किया गया, जहां से जमानत मिल जाने की भी खबर मिल रही है। Despite the repeated issuance of summons and warrants in various cases—including those involving bounced cheques—the individual had remained absconding for a long time.
उल्लेखनीय है कि आईएएस अधिकारी रमेश थेटे अपने पूरे कार्यकाल में चर्चित रहे। उनकी प्रशासनिक सेवा की शुरुआत छिंदवाड़ा में बतौर एसडीएम के रूप में हुई। इसके बाद में जबलपुर नगर निगम के कमिश्नर बनाए गए। कमिश्नर के रूप में उनके द्वारा सख्त निर्णय और जनहित के कामों की वजह से वे हमेशा सुर्खियों में बने रहे। उस समय के महापौर विश्वनाथ दुबे तथा पूर्व विधानसभा क्षेत्र के विधायक अंचल सोनकर से भी उनका लंबा पंगा चला। रमेश थेटे की FIR पर अंचल सोनकर को जेल तक जाना पड़ा था। रमेश थेटे ने जबलपुर नगर निगम के कमिश्नर के रूप में मॉडल रोड नाम की सड़क की ऐसी सौगात दी, जो आज भी मील के पत्थर की तरह स्थापित है। समूचे जबलपुर के निर्माण और विकास कार्यों में मॉडल रोड आज भी बेमिसाल बनी हुई है। रमेश थेटे प्रशासनिक कार्यों के अलावा गीत, संगीत, फिल्म निर्माण आदि के भी काफी शौकीन रहे। जिसके चक्कर में उन्होंने बैंकों से लोन लिया। आरोपित तौर पर एक बड़े रिश्वत कांड में भी गिरफ्तार हुए। आय से अधिक अनुपातहीन संपत्ति का मुकदमा भी लोकायुक्त पुलिस द्वारा दर्ज किया गया। कानूनी पेंचेदगियों में लगातार घिरे रहे। शासकीय सेवा के दौरान हालत यह बने कि वे डायरेक्ट IAS होते हुए भी किसी भी जिले के कलेक्टर नहीं बन पाए और ना ही किसी संभाग के कमिश्नर बनाए गए।
