रफीक खान
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच ने राज्य सरकार का एक आदेश पूरी तरह रद्द कर दिया। डॉक्टर्स के मामले में दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अगर डॉक्टर पदोन्नत होकर प्रशासनिक पद पर चला जाता है और उसने अपनी नौकरी के दौरान 20 साल की आवश्यक क्लीनिकल सेवा पुरी की है तो सरकार उसे 62 वर्ष में रिटायर नहीं कर सकती। इस तरह के डॉक्टर 65 वर्ष की आयु तक सेवा करने के पूरे तरह हकदार हैं। High Court rules: Even if a doctor is promoted to an administrative post, they retain the right to continue in service until the age of 65.
जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि डॉक्टर शिवराम सिंह कुशवाहा को 30 जून 2024 से बैक डेट में 62 वर्ष की आयु में रिटायर करने का फैसला सुना दिया गया था। सरकार का उनके मामले में तर्क दिया था कि वह प्रशासनिक पद के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर पर आ चुके थे। ऐसी स्थिति में उनकी सेवा अवधि क्लिनिकल प्रैक्टिस में शामिल नहीं की जा सकती। नियम में प्रावधान है कि जिन डॉक्टरों ने 20 साल की क्लीनिकल सेवा यानी कि मरीज के इलाज का अनुभव पूरा कर लिया है। उन्हें 65 वर्ष की आयु तक सेवा में रहने का अधिकार है, जबकि कुछ डॉक्टर प्रशासनिक पदों पर अपनी सेवाएं देते हैं। ऐसी स्थिति में उनके साथ विसंगति पूर्ण बर्ताव हो रहा था। डॉक्टर शिवराम सिंह कुशवाहा के 4 जून 2026 के सेवानिवृत्ति आदेश को निरस्त कर हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की एकल पीठ ने स्वास्थ्य विभाग में एक नई नजीर कायम कर दी है। निश्चित तौर पर हाईकोर्ट के इस आदेश से कई डॉक्टर लाभान्वित होंगे।
