मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के कलेक्टर ने एक बुजुर्ग की मदद करते हुए न सिर्फ उन्हें अपनी भाजपा पार्षद बहू से परेशान होने से बचा लिया बल्कि कब्जे में चली आ रही मकान और दुकान को खाली करने के भी आदेश दे दिए। एसडीएम, तहसीलदार, सीएसपी तथा थाना प्रभारी को जिम्मेदारी देते हुए एक माह के भीतर आदेश पर अमल करने के निर्देश दिए गए हैं। इस बीच यह भी हिदायत दी गई है कि बुजुर्ग को किसी भी तरह से परेशान ना किया जाए। और ना ही कोई दबाव बनाकर धमकाया आदि जाए। भाजपा पार्षद के रसूख के चलते एसडीएम अधारताल ने भयभीत होकर न्याय नहीं किया था। एसडीएम के आदेश को कलेक्टर जबलपुर राघवेंद्र सिंह ने पलट दिया। SDM Adhartal failed to deliver justice due to fear of political influence; Collector overturned the decision and granted a one-month reprieve.
जानकारी के अनुसार कहा जाता है कि कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम 2007 के अंतर्गत कलेक्टर न्यायालय में दायर अपील के दो अलग-अलग प्रकरण में आदेश पारित कर एक में जहां बुजुर्ग पिता की संपत्ति पर कब्जा करने वाले बेटे को बेदखल करने का निर्णय दिया है, वहीं दूसरे प्रकरण में भाजपा पार्षद रेणू कोरी को अपने 87 वर्षीय ससुर के मकान एक माह में खाली करने का फैसला सुनाया है। कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने 87 वर्षीय बुजुर्ग के पक्ष में निर्णय देते हुए उनकी बहू को एक महीने के भीतर विवादित मकान खाली करने का आदेश दिया है। गोहलपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत त्रिमूर्ति नगर (डॉ. राममनोहर लोहिया वार्ड क्र. 29) निवासी 87 वर्षीय रूपलाल कोरी टेलीग्राफ फैक्ट्री से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। उन्होंने अपनी बचत से वर्ष 1986 में 2400 वर्गफुट का भूखंड खरीदकर मकान बनवाया था। उनके पांच पुत्र और तीन पुत्रियां हैं। श्री कोरी ने कलेक्टर न्यायालय में दायर अपील में बताया था कि उनके दिवंगत पुत्र राकेश कोरी की पत्नी श्रीमती रेनू कोरी ने मकान के कमरों व दुकान पर कब्जा कर रखा है। मकान पुराना व जर्जर होने के कारण जब उन्होंने मरम्मत का प्रयास किया, तो उसमें बाधा उत्पन्न की गई। इसके चलते वयोवृद्ध अवस्था में उन्हें मानसिक व व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। चूँकि श्रीमती रेणू कोरी बीजेपी से जुड़ी है इसलिये पार्टी का दबाव प्रशासन पर रहने के कारण न्यायसंगत कार्यवाही होने मे दिक्कतें आ रहीं हैं। बुजुर्ग श्री कोरी ने पहले अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) अधारताल के समक्ष बेदखली हेतु आवेदन किया था। एसडीएम न्यायालय ने 15 मई 26 को इसे संपत्ति व बंटवारे का पारिवारिक विवाद बताते हुए आवेदन निरस्त कर दिया था। कलेक्टर न्यायालय में सुनवाई के दौरान अनावेदिका भाजपा नेत्री श्रीमती रेनू कोरी ने तर्क दिया कि उक्त भवन का पुनर्निर्माण उनके स्वर्गीय पति (चिकित्सक) की आय से हुआ था। पति के निधन के बाद वे और उनका बेटा इसके कानूनी उत्तराधिकारी हैं और वे एक विधवा व शारीरिक रूप से अस्वस्थ महिला हैं। प्रकरण में विस्तृत सुनवाई के बाद कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने एसडीएम अधारताल के पुराने आदेश को निरस्त कर दिया। कलेक्टर श्री सिंह ने निर्देश दिए कि अनावेदिका श्रीमती रेनू कोरी आदेश प्राप्ति के एक माह के भीतर अपने परिवार और सामान सहित इस मकान से कब्जा समाप्त करें। एक माह का समय बच्चों की शिक्षा और पारिवारिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए दिया गया है, लेकिन इस अवधि के दौरान अपीलार्थी के सम्मान, सुरक्षा या संपत्ति को प्रभावित करने वाला कोई कृत्य नहीं किया जाएगा। कलेक्टर श्री सिंह ने आदेश में तहसीलदार अधारताल और थाना प्रभारी गोहलपुर को समय-सीमा के भीतर इसका विधिवत पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिये हैं।कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने 70 वर्षीय बुजुर्ग पिता की अपील स्वीकार करते हुए उनके 50 वर्षीय पुत्र को बेलबाग स्थित मकान व दुकान से एक माह के भीतर कब्जा खाली करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही उन्होंने एसडीएम रांझी द्वारा पूर्व में दिए गए आदेश को निरस्त कर दिया गया है। मदन महल निवासी 70 वर्षीय बसंत कुमार रामचंदानी ने कलेक्टर न्यायालय में अपनी अपील में बताया था कि बेलबाग मेन रोड स्थित 1050 वर्गफुट का दो मंजिला मकान (जिसमें दुकानें भी शामिल हैं) उन्होंने वर्ष 1983 में अपनी कमाई से खरीदा था। वर्ष 16 में उन्होंने अपने पुत्र सुनील कुमार रामचंदानी के पक्ष में इस संपत्ति की एक वसीयत पंजीकृत कराई थी।
