वृंदावन के संतों और यादव-अहीर समाज ने की बयान की तीखी निंदा, माफी मांगने पर भी नहीं थमेगा विवाद - khabarupdateindia

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Tuesday, 3 November 2026

वृंदावन के संतों और यादव-अहीर समाज ने की बयान की तीखी निंदा, माफी मांगने पर भी नहीं थमेगा विवाद


रफीक खान
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करेरा में राम कथा के दौरान भगवान श्री कृष्णा पर की गई टिप्पणी की चौतरफा आलोचना हो रही है। वृंदावन के संतों से लेकर यादव, यदुवंशी, अहीर समाज ने धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इन सभी का कहना है कि मनुष्य को मर्यादा से बाहर नहीं जाना चाहिए। किसी धार्मिक सिंहासन पर बैठने के बाद इसकी गरिमा को बनाए रखना बहुत जिम्मेदारी का काम होता है। भगवान श्री कृष्ण को आम आदमी जैसा समझ कर निशाना बनाना बर्दाश्त करने योग्य नहीं है। बड़े-बड़े संतों ने भी धीरेंद्र शास्त्री का विरोध किया है। मध्य प्रदेश के भोपाल, ग्वालियर, शिवपुरी आदि में लोग सड़कों पर उतर आए। पुतला दहन और ज्ञापन तक सौंपे गए हैं। इस तरह की परिस्थितियों ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर बाबागिरी क्यों बाबागर्दी तक पहुंच गई? धर्म का मर्म जानने वाले भला ऐसी टिप्पणी गलती से कैसे कर सकते हैं? गलतियां तो अनजाने में होती हैं और अगर आप संत या धर्मगुरु हो तो फिर गलती का तो सवाल ही नहीं उठता? Saints of Vrindavan and the Yadav-Ahir community have strongly condemned the statement; the controversy will not subside even with an apology.

उल्लेखनीय है कि कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान राम और श्रीकृष्ण की तुलना करते हुए कहा था कि भगवान राम सीधे खड़े होते हैं, उनका नाम सीधा है और उनका धाम (अयोध्या) भी सीधा है। श्रीकृष्ण के स्वरूप पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि "तुम्हारे वाले ठाकुर जी तो फोटो में भी टेढ़े दिखाई देते हैं, पैर पर पैर रखकर, कमर लचकाकर और गर्दन टेढ़ी करके बांसुरी बजाते हैं... खड़े भी होते हैं तो तीन जगह से टेढ़े।" उन्होंने वृंदावन धाम और श्रीकृष्ण की लीलाओं को लेकर भी तुलनात्मक बातें कही थीं। हिंदू धर्म के भगवानों के बीच इस तरह की बात अगर कोई अज्ञानी करे तो एक पल समझ भी आता है, कि यह नादानी है। अगर धर्म के पैरोकार इस तरह की बातें करने लगे, तब फिर बवाल होना लाजमी है। वृंदावन में अनिरुद्ध आचार्य को छोड़कर बाकी सभी छोटे-बड़े बाबाओं ने धीरेंद्र शास्त्री पर तीखे प्रहार किए हैं। राष्ट्रीय यादव समाज से लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव तक ने इस तरह की टिप्पणियों को बेहद शर्मनाक बताया है। संतों का कहना है कि थोड़ा सा पैसा आ जाने के बाद मर्यादाओं को लाँघना अच्छी निशानी नहीं है। कुछ संतों ने यहां तक कहा कि ऐसा कहने वाला ना तो साधु है, ना हिंदू धर्म का अनुयाई और ना ही भारत का नागरिक।