अस्पताल में भर्ती पूर्व मंत्री विधायक अजय बिश्नोई का छलका दर्द, बोले लोकसभा प्रत्याशी आशीष दुबे ने उनके चुनाव में किया था पार्टी के विरुद्ध काम - khabarupdateindia

खबरे

अस्पताल में भर्ती पूर्व मंत्री विधायक अजय बिश्नोई का छलका दर्द, बोले लोकसभा प्रत्याशी आशीष दुबे ने उनके चुनाव में किया था पार्टी के विरुद्ध काम





Rafique Khan
लोकसभा चुनाव 2024 के लिए भाजपा प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद एक दूसरे से प्रतिद्वंतता रखने वालों का दर्द सामने आने लगा है अस्पताल में भर्ती मध्य प्रदेश शासन के पूर्व कैबिनेट मंत्री तथा पाटन विधानसभा क्षेत्र के विधायक अजय बिश्नोई ने ट्वीट कर कहा है कि जबलपुर संसदीय क्षेत्र से घोषित किए गए भाजपा प्रत्याशी आशीष दुबे ने उनके चुनाव में पार्टी के विरोध में काम किया था। हालांकि उन्होंने ट्वीट में कहा है कि अब यह सब भूलना होगा और पार्टी के हित में काम करते हुए भाजपा को जिताना होगा। ट्वीट पर अंकित किए गए यह चंद शब्द भाजपा के लिए, विधायक अजय बिश्नोई के लिए और पार्टी द्वारा बनाए गए जबलपुर संसदीय क्षेत्र के प्रत्याशी के लिए कितने फायदे और नुकसान वाले होंगे... यह तो वक्त ही तय करेगा।

यह जरूर है कि संगठन में साथ रहकर कितने भी समय बिताने वालों के बीच मां के भेद शून्य पर नहीं पहुंच पाते हैं। जब भी जिसे जैसा मौका मिलता है, वह अपने अंदाज में काम करता है। अगर अजय बिश्नोई की बात को सही माना जाए तो आशीष दुबे ने अपने तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी और विश्नोई जी ने अस्पताल में भर्ती होने के बाद में भी उनके लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाए जाने की घोषणा को आसानी से स्वीकार नहीं किया। गौरतलब है कि आशीष दुबे और अजय बिश्नोई का साथ काफी पुराना है। आशीष दुबे का गृह ग्राम पाटन विधानसभा क्षेत्र में ही आता है। राजनीतिक यात्रा में आशीष दुबे ने हमेशा पाटन, कटंगी, मझौली क्षेत्र पर फोकस करते हुए काम किया लेकिन विधायक अजय बिश्नोई को लगातार विधानसभा चुनाव में टिकट मिलने के कारण उनकी दावेदारी प्रत्याशी के रूप में परिणित नहीं हो पाई। विधानसभा 2019 और 2024 के चुनाव में आशीष दुबे पूरी शिद्दत के साथ टिकट हासिल करने के लिए प्रयास करते रहे किंतु पार्टी ने अजय बिश्नोई पर ही विश्वास जताया। इन परिस्थितियों के चलते 2024 के विधानसभा चुनाव में स्वाभाविक तौर पर आशीष दुबे काफी मायूस हो गए थे। हालांकि भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक ऑब्जर्वेशन में आशीष खरे उतरे और राकेश सिंह के लोकसभा से विधानसभा की और कूच करने के बाद उनकी राह संसद के लिए प्रशस्त हो गई। वैसे देखा जाए तो आशीष दुबे बेहद व्यवहार कुशल और मृदुभाषी है। पार्टी के इक्का दुक्का लोगों को प्रतिद्वंदिता के कारण अगर छोड़ दिया जाए तो आमतौर पर उनकी पहचान मिलनसारिता वाली है। आम जनों में भी उनके व्यवहार को लेकर कहीं कोई शिकवा शिकायत नहीं है। लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी बनाए जाने के बाद जो प्रतिक्रियाएं पार्टी के कार्यकर्ताओं से लेकर आम जनों तक की आ रही है, वह पूरे तौर पर सकारात्मक है।