रफीक खान
मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (181) और पुलिस व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। आरोप है कि पुलिस विभाग के कुछ कर्मचारियों ने अपनी कार्यप्रणाली की रेटिंग और ग्रेडिंग बेहतर दिखाने के लिए महज 21 मोबाइल नंबरों का उपयोग कर 233 फर्जी शिकायतें दर्ज कराईं और बाद में उनका समाधान दिखाकर रिकॉर्ड सुधार लिया। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 प्रदेश में नागरिकों की शिकायतों के निराकरण के लिए संचालित की जाती है। मामला संज्ञान में आने के बाद पुलिस अधीक्षक ने फिलहाल एक सिपाही को लाइन अटैच कर दिया है। थाना प्रभारी सहित कई पुलिस कर्मचारी जांच के दायरे में आ गए हैं। Cops devised a bizarre scheme to pat their own backs; the SP reassigned one officer to police lines, while several others including the TI are now under scrutiny.
जानकारी के अनुसार, शिकायतों के पैटर्न की जांच के दौरान कई संदिग्ध मामले सामने आए। पड़ताल में पाया गया कि जिन लोगों के नाम से शिकायतें दर्ज थीं, उन्हें खुद इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनके नाम से कोई शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में की गई है। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ मोबाइल नंबरों का उपयोग बार-बार अलग-अलग नामों से शिकायत दर्ज कराने के लिए किया गया। आरोप है कि इस पूरे खेल में पुलिसकर्मी, डायल-112 से जुड़े कर्मचारी और एक थाना प्रभारी का चालक शामिल रहा।
कुंवारे युवक की 20 साल की बेटी
सबसे चौंकाने वाला मामला अंकित चौरसिया नामक युवक का बताया जा रहा है। जांच के दौरान पता चला कि उसके नाम पर 20 वर्षीय बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कर दी गई, जबकि वह स्वयं अविवाहित है। इस तरह के कई मामलों ने पूरे फर्जीवाड़े की पोल खोल दी। शिकायतों के त्वरित निराकरण और बेहतर प्रदर्शन दिखाने के दबाव में यह पूरा खेल खेला गया। पहले फर्जी शिकायतें दर्ज कराई गईं, फिर पुलिस ने खुद ही उनका समाधान कर दिया। इससे विभागीय आंकड़ों में शिकायतों के निराकरण का प्रतिशत बढ़ गया और प्रदर्शन बेहतर दिखने लगा।
जांच के बाद मच सकता है हड़कंप
मामले के सामने आने के बाद पुलिस विभाग और जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों और कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक प्रकरण भी दर्ज हो सकते हैं। यह मामला केवल फर्जी शिकायतों तक सीमित नहीं है, बल्कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसी जनहित की व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है। सरकार पहले भी CM हेल्पलाइन में झूठी शिकायतों और सिस्टम के दुरुपयोग पर सख्ती की बात कह चुकी है।
