रफीक खान
राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में बड़ा खुलासा सामने आया है। उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी प्रारंभिक जांच में करीब 150 लोगों को संदेह के दायरे में माना है, जबकि 25 प्रमुख लोगों के खिलाफ सबसे पहले कार्रवाई की तैयारी चल रही है। जांच में संज्ञेय अपराध के संकेत मिलने के बाद स्थानीय थाने में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी गई 150 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट में ट्रस्ट के कुछ कर्मचारियों, बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़े कर्मियों तथा निजी एजेंसियों की भूमिका की पड़ताल की गई है। हालांकि रिपोर्ट में किसी वरिष्ठ ट्रस्ट पदाधिकारी को सीधे आरोपी नहीं बनाया गया है, लेकिन कई लोगों से विस्तृत पूछताछ की गई है और उनकी भूमिका की जांच जारी है। Ram Mandir Donation Theft, SIT Report Ayodhya, 150 Suspects FIR, Champat Rai, Ram Janmabhoomi Trust, Ayodhya News, Yogi Adityanath, Ram Mandir Scam Investigation, Ayodhya SIT Report
सूत्रों के मुताबिक जांच का सबसे बड़ा फोकस मंदिर में चढ़ावे की गिनती और उसके प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों पर है। रामशंकर यादव उर्फ टीनू यादव, लवकूश, अवनीश, अनुकल्प और करुणे सहित कई कर्मचारियों से पूछताछ की गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि चढ़ावे की नकदी और आभूषणों के प्रबंधन में कहीं कोई हेराफेरी तो नहीं हुई। जांच के दौरान कुछ कर्मचारियों के पास से नकदी और सोने की बरामदगी संबंधी दावों की भी पड़ताल की जा रही है।
ये नाम भी जांच के घेरे में
एसआईटी ने ट्रस्ट और मंदिर प्रबंधन से जुड़े कई लोगों से पूछताछ की है। इनमें ट्रस्ट महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा तथा निर्माण कार्य से जुड़े गोपाल राव सहित अन्य कर्मचारियों से भी जानकारी ली गई है। जांच टीम ने उनसे प्रशासनिक व्यवस्था, चढ़ावा प्रबंधन और निगरानी प्रणाली से जुड़े सवाल पूछे। इसके अलावा मयंक, शिवम पांडे, आशीष दुबे, रत्नेश, आशीष अग्निहोत्री और फूलकांत मिश्रा समेत कई कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। रिपोर्ट में एसबीआई के कुछ कर्मचारियों तथा डिजिटल रिकॉर्ड और सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाली निजी एजेंसियों के कर्मियों की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि चढ़ावे की राशि जमा करने और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की प्रक्रिया में कहीं कोई गंभीर चूक तो नहीं हुई।
6 दिन में 200 से ज्यादा से पूछताछ
एसआईटी ने लगातार छह दिनों तक अयोध्या में कैंप कर 200 से अधिक लोगों से पूछताछ की। इसके बाद तैयार की गई 150 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी गई। रिपोर्ट में प्रणालीगत खामियों, निगरानी व्यवस्था की कमजोरियों और प्रशासनिक लापरवाही से जुड़े कई बिंदुओं का उल्लेख किया है।
FIR के बाद तेज होगी कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री स्तर पर रिपोर्ट की समीक्षा पूरी होने के बाद स्थानीय पुलिस एफआईआर दर्ज कर सकती है। इसके बाद जांच के दायरे में आए 25 प्रमुख लोगों के खिलाफ सबसे पहले कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। वहीं 150 संदिग्धों की पूरी सूची फिलहाल गोपनीय रखी गई है और जांच आगे बढ़ने के साथ नए नाम भी सामने आ सकते हैं।
