रफीक खान
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के अंतर्गत नरवर किले से सिंधिया रियासत कालीन 400 साल पुरानी और साढे तीन टन वजनी तोप को चुरा लिया गया। राजस्थान के करौली जिले में आने वाले गांवड़ा गांव के मीणा समाज ने संयुक्त रूप से इस ऐतिहासिक चोरी की प्लानिंग की और एक बार फेल होने के बाद दोबारा 50 से अधिक लोग पहुंचे तथा तोप को चुरा ले गए। पुलिस ने सीसी कैमरों की फुटेज के आधार पर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर सघन पूछताछ की। मामले की जांच अभी भी जारी है तथा तोप की बरामदगी भी नहीं हो सकी है। A plan was hatched during a panchayat meeting as part of a social struggle; 25 people went to the fort, removed a cannon, and hauled it away—the police will now recover it.
जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि राजस्थान के करौली जिले के गांव गांवड़ा के मीणा समाज के लोगों ने पड़ोसी गांव के गुर्जर समाज के लोगों को डराने के लिए इस वारदात को अंजाम दिया। दोनों समाजों में वहां के बांध के पानी को लेकर अरसे से तनातनी चली आ रही है। चूंकि इस बरसात में फिर पानी छोड़े जाने के दौरान मीणा पक्ष को विवाद की आशंका थी, इसलिए उन्होंने गुर्जर पक्ष को डराने के लिए कि वह बांध को तोप से उड़ा देंगे, इतनी बड़ी घटना को अंजाम दे डाला। यह राजफाश शिवपुरी पुलिस ने घटना में शामिल रहे दो आरोपितों को करौली से गिरफ्तार करने के बाद किया है। करौली जिले के सदर हिंडौन थाना क्षेत्र स्थित पालनपुर गांव निवासी अमन कुमार मीणा और गांवड़ा गांव निवासी टिम्मू राम मीणा नाम के गिरफ्तार दोनों आरोपितों ने पुलिस को बताया कि पूरे गांव ने मिलकर तोप चुराने की प्लानिंग की थी। गूगल पर सर्च किया कि देश के किस-किस किले पर तोपें रखी हैं। कई किलों को देखा और आखिर में नरवर किले की 14 तोपों में से सबसे छोटी पांच फीट दो इंच की यह तोप चोरी करने का निर्णय आम सहमति से लिया गया, क्योंकि यह तोप चलने लायक अवस्था में दिख रही थी और इसे ले जाना अन्य तोपों के मुकाबले आसान था। आरोपितों ने तोप ले जाने का रूट तय किया और इसके लिए सबसे पहले तीन जुलाई को तीन वाहनों में 25 लोग नरवर किला पहुंचे। उन्होंने तोप को उसके स्थान से हटा भी दिया था, लेकिन करीब साढ़े तीन टन वजन होने के कारण उसे उस दिन नहीं ले जा सके तो वे सब लौट गए।इसके बाद पूरी तैयारी के साथ दोबारा 15-16 जुलाई की दरम्यानी रात 50 से ज्यादा लोग नरवर किला पहुंचे। यहां तोप को किला से उतारने के बाद एक पिकअप पर लाद लिया और लंबा रूट तय करके करौली ले गए। वहां एक घर पर तोप को उतारकर रख लिया गया, ताकि उस पर किसी बाहरी की नजर न पड़ सके। संभवत: यह देश की पहली वारदात होगी, जहां किसी किले से ऐतिहासिक और इतनी वजनदार तोप को उड़ा लिया गया।
.jpg)