रफीक खान
मध्य प्रदेश में लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 के तहत कार्यवाहक प्रभार समाप्त कर नियमित पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसे लेकर कई तरह की आशंकाएं-कुशंकाएं सामने आ रही है। खास तौर से पुलिस विभाग में जबरदस्त हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई है। अब तक कार्यवाहक प्रभार से पदोन्नत हुए 15000 पुलिस कर्मचारी-अधिकारी डिमोशन की कगार पर पहुंच चुके हैं। पांढुर्णा जिले से इसकी शुरुआत भी हो गई है। जहां तीन दर्जन हवलदारों को फिर से सिपाही बना दिया गया है। कई डीएसपी और सीएसपी को फिर टीआई बनना पड़ेगा तो कई टीआई, एसआई और एएसआई के कंधों से सितारे छिन जाएंगे। यानी कि उनका एक-एक फूल कम हो जाएगा। नियमित पदोन्नति के तहत आरक्षित वर्ग को निश्चित लाभ देने के चलते बहुत लोगों का पत्ता साफ होना तय हो गया है। सभी पुलिस ज़ोनों तथा जिलों में स्क्रुटनी का कार्य बहुत तेजी के साथ चल रहा है और अगले एक-दो दिन में स्थितियां बड़ी ही विकट होने वाली है। DSPs and CSPs set to revert to the rank of TI; SIs and ASIs to lose their stars—massive upheaval in the police department.
वैसे तो उक्त नियम मध्य प्रदेश शासन के सभी विभागों के लिए है लेकिन पुलिस फील्ड वाला विभाग है। यहां कार्यवाहक का प्रभार खत्म होने के बाद अगर सामान्य वर्ग के वरिष्ठ कर्मचारी और अधिकारियों को आरक्षण के चलते समय पर पदोन्नति नहीं मिली तो स्थिति बहुत ही विकट होने वाली है। इस संबंध में हाई कोर्ट में भी मामले की सुनवाई चल रही है और 13 जुलाई को तारीख निर्धारित की गई है। पहली कार्रवाई पांढुर्णा जिले के पुलिस अधीक्षक द्वारा की जा चुकी है। कार्यवाहक प्रधान आरक्षक (Head Constable) के रूप में कार्य कर रहे 32 पुलिसकर्मियों का प्रभार खत्म कर दिया गया है और उन्हें वापस आरक्षक (Constable) के मूल पद पर भेज दिया गया है। पुलिस मुख्यालय (PHQ) का स्पष्ट निर्देश है कि जिन कर्मचारियों का रिकॉर्ड तय मानकों पर खरा नहीं उतरेगा, उनसे उच्च पद का कार्यभार वापस ले लिया जाएगा। प्रारंभिक समीक्षा में लगभग 1,000 पुलिसकर्मियों की पहचान की गई है। मध्य प्रदेश के सभी 55 जिलों में जिला स्तर पर गठित कमेटियों द्वारा पिछले 5 साल के सेवा रिकॉर्ड (ACR, विभागीय जांच, निलंबन) की समीक्षा तेजी से की जा रही है। अपात्र पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों की सूची तैयार की जा रही है। जबलपुर और ग्वालियर दोनों रेंजों के आईजी (IG) और एसपी (SP) कार्यालयों में विशेष समीक्षा समितियों का काम पूरा हो चुका है। जबलपुर और ग्वालियर संभाग के जिलों से प्रारंभिक तौर पर लगभग 150 से अधिक ऐसे पुलिसकर्मियों की पहचान की गई है जो तय मानकों (जैसे निलंबन या गंभीर विभागीय दंड) पर खरे नहीं उतर रहे हैं और उनका प्रभार अगले कुछ ही दिनों में छीना जा सकता है। मुख्यमंत्री और डीजीपी की समीक्षा बैठक के बाद नियमित पदोन्नति की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसका मतलब है कि जहाँ एक तरफ अपात्रों का कार्यवाहक प्रभार छिनेगा, वहीं पात्र पुलिसकर्मियों को अगले 48 घंटे में नियमित प्रमोशन का लाभ भी मिलने जा रहा है।
