11 पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उनकी संपत्ति कुर्क करने की सिफारिश, आय और बैंक खातों में भारी अंतर - khabarupdateindia

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Monday, 13 July 2026

11 पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उनकी संपत्ति कुर्क करने की सिफारिश, आय और बैंक खातों में भारी अंतर


रफीक खान
राजस्थान के नागौर जिले में स्थित प्रसिद्ध बुटाटी धाम चतुरदास महाराज मंदिर में 22.74 करोड रुपए के घोटाले का खुलासा हुआ है। एसडीएम की अध्यक्षता वाली 13 सदस्यीय कमेटी की जांच रिपोर्ट में व्यापक पैमाने में अनियमितताएं मिली है। दान और आय के अन्य स्रोतों से जो राशि जमा हुई, बैंक खातों में उसका मिलान काफी भिन्न पाया गया। बड़ी-बड़ी राशियों को दर्ज ही नहीं किया गया। जबकि बिल अत्यधिक मात्रा में बनवा लिए गए। एसडीएम ने अपनी जांच रिपोर्ट में 11 पदाधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज कर उनकी संपत्ति कुर्क करने की सिफारिश की है। FIR registered against 11 office-bearers and recommendation made to attach their assets; massive discrepancy found between income and bank account balances.

जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि इस मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो तत्कालीन जिला कलेक्टर अरुण कुमार पुरोहित ने 29 जनवरी 2026 को सबसे पहले इस मामले में एक 6 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था. बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए इसमें 7 और सदस्य जोड़े गए, जिससे यह 13 सदस्यीय विशाल समिति बन गई. समिति ने पूरे 146 दिनों की गहन पड़ताल के बाद 23 जून 2026 को यह अंतिम रिपोर्ट वर्तमान जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार को सौंपी है। प्रशासन द्वारा गठित 13 सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति ने वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 के ऑडिट रिकॉर्ड का वास्तविक दस्तावेजों से मिलान किया, जिसमें पाई गईं प्रमुख अनियमितताएं इस प्रकार हैं:-

1. ₹2.60 करोड़ की सोने-चांदी की संपत्ति रिकॉर्ड से गायब

2. भोजनशाला में ₹49.49 लाख का फर्जी खर्च, रसोई में ₹1.17 करोड़ का खेल।

3. ₹82.41 लाख के सीसीटीवी और जाली वाउचरों का जाल।

4. ग्राम विकास और मरम्मत के नाम पर ₹1.28 करोड़ का फर्जीवाड़ा।

5. सुलभ कॉम्प्लेक्स का किराया दबाया, गोशाला व सुरक्षा में भी सेंध।

6. दान पेटी और बैंक खातों में लाखों का अंतर।

वर्तमान समिति को तत्काल निलंबित कर मंदिर की कमान किसी राजपत्रित अधिकारी (Gazetted Officer) को सौंपी जाए, रिकॉर्ड को सील किया जाए और बैंक खातों व डिजिटल पेमेंट प्रणालियों को फ्रीज कर एक स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट (Forensic Audit) कराया जाए।