रफीक खान
मध्य प्रदेश के जबलपुर में इन दिनों टोल प्लाजा समेत अन्य कई धोखाधड़ियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेता उज्जवल पचौरी का नाम खूब सुर्खियां बटोर रहा है। पीड़ित पक्ष उज्जवल पचौरी को आरोपी ना बनाए जाने से बेहद नाराज है। उसने हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाने की चेतावनी दे डाली है। यहां बड़ा सवाल यह है कि उज्जवल पचौरी जालसाजी, बदमाशी, धोखाधड़ी जैसे मामलों में वाकई आरोपी बन सकता है या नहीं? यह पुलिस जांच से ही तय होगा। दुर्भाग्य है कि महीनों से चल रही इस कहानी के बावजूद पुलिस अब तक ना तो उज्जवल पचौरी को क्लीन चिट दे पाई है और ना ही आरोपी बनाया जा सका है? इन परिस्थितियों में पुलिस की मजबूर और खामोश शैली आम लोगों के बीच संदिग्ध बना रही है। If there is no wrongdoing or fraud, give Ujjwal Pachauri a clean chit; otherwise, include his name in the FIR.
जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर निवासी मोनू राघव, सचिन वार्ष्णेय और पुनीत ने दावा किया है कि उन्हें टोल प्लाजा में साझेदार बनाने एवं निवेश की राशि दोगुनी होने का झांसा देकर निवेश कराया गया। इस दौरान मदन महल स्टेशन से टेलीग्राफ फैक्ट्री रेलमार्ग स्थित यूवी आनलाइन कार्यालय में स्टांप पर अनुबंध तैयार किए गए और उन्हें बताया गया कि यह प्रक्रिया पूरी तरह वैध है। तीनों शिकायतकर्ताओं ने अनुसार टोल प्लाजा में साझेदारी अनुबंध के समय उन्होंने इसकी वैधता को लेकर सवाल उठाया था। तब आरोपितों ने उन्हें आश्वस्त किया गया कि संबंधित कार्य के लिए आवश्यक अधिकार प्राप्त हैं और निवेश सुरक्षित रहेगा। उन्हें बाद में जानकारी मिली कि अनुबंध वैध नहीं थे और निवेश की गई राशि डूब गई। आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में अमित खम्परिया और उज्ज्वल पचौरी की मिलीभगत थी। मोनू राघव का दावा है कि उन्होंने पहले जबलपुर में इस मामले की शिकायत की थी। अब उत्तर प्रदेश में भी यूवी आनलाइन के संचालक के खिलाफ शिकायत दी है। तीनों पीड़ित जल्द ही जबलपुर पहुंचकर पुलिस अधीक्षक एवं आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) में भी आवेदन प्रस्तुत करेंगे। यूवी आनलाइन प्रतिष्ठान का निर्माण भी सरकारी जमीन पर होने का आरोप है। यह भी आरोप लगाया कि टोल प्लाजा पार्टनरशिप से जुड़े करोड़ों रुपये के अनुबंध कम मूल्य के स्टांप पर तैयार किए गए, उनमें एक महिला की भी भूमिका रही है। उनका कहना है कि जांच के दौरान कई दस्तावेज और गवाहों के बयान सामने आए हैं, जिनके आधार पर पूरे मामले की विस्तृत जांच आवश्यक है। जांच होगी तो सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा।
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