घूसखोरी में पकड़ा गया तो खुलने लगे राज, वरना आराम से सो रहा था सरकारी सिस्टम, दमोह में पकड़ा था पहला साथी - khabarupdateindia

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Monday, 6 July 2026

घूसखोरी में पकड़ा गया तो खुलने लगे राज, वरना आराम से सो रहा था सरकारी सिस्टम, दमोह में पकड़ा था पहला साथी


रफीक खान
मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में पिछले दिनों घूसखोरी में पकड़े गए एक डॉक्टर की डिग्री भी फर्जी निकली है। फर्जी डिग्री का लिंक दमोह में पकड़े गए फर्जी डॉक्टर से कनेक्ट पाया गया है। इसके साथ ही बड़ा चौकाने वाला मामला यह आया है कि डॉक्टर अकेले शहडोल नहीं बल्कि श्योपुर में भी नौकरी कर रहा था। फर्जी डिग्री के आधार पर दो-दो सरकारी नौकरी, दो-दो सैलरी लेने के मामले ने पूरे सिस्टम की कलई खोल दी है। ऐसा लग रहा है जैसे सरकारी सिस्टम सो रहा हो। यहां के जिम्मेदारों को किसी चीज की ना कोई फिक्र है ना खबर है। Secrets began to spill out once he was caught taking a bribe—otherwise, the government system was slumbering peacefully; the first accomplice was nabbed in Damoh.

जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि मध्यप्रदेश में फर्जी डिग्री रजिस्ट्रेशन के सहारे एक और संविदा डॉक्टरों की नौकरी का मामला सामने आया है। दमोह से खुले मामले में विभिन्न जिलों से करीब 12 फर्जी डॉक्टर और दो अन्य आरोपी पकड़े गए। अब इनसे भी बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा शहडोल में हुआ है। संविदा मेडिकल ऑफिसर डॉ. महेशचंद शर्मा दो जिलों में नौकरी कर रहा था। शहडोल जिले के जयसिंहनगर ब्लॉक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उफरी में और श्योपुर जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सहसराम में। दोनों जिलों के अफसर नियुक्ति, उपस्थिति, वेतन भुगतान और सेवा अभिलेखों की जांच में जुटे हैं। पता चला कि डॉ. शर्मा ने 2020-21 में सहसराम में पदभार ग्रहण किया था। आरोप है, वहां की सेवा समाप्त किए बिना 2024 में उफरी में भी नियुक्ति ले ली। सवाल है, दोनों जगह सेवा अभिलेख सक्रिय थे, तो एनएचएम और स्वास्थ्य विभाग की डिजिटल निगरानी व्यवस्था इसे पकड़ क्यों नहीं सकी। श्योपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने शहडोल से डॉ. शर्मा की पदस्थापना, उपस्थिति, वेतन भुगतान और सेवा संबंधी सभी दस्तावेज मांगे हैं। दोनों जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों के बीच समन्वय बनाकर मिलान किया जा रहा है।