रफीक खान
मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में चरपट होती शिक्षण व्यवस्था, पेपर लीक, जंतर मंतर में किए गए बल प्रयोग तथा युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ समेत अन्य मांगों को लेकर मालवीय चौक पर किए गए आंदोलन के दौरान पुलिस और कांग्रेस नेताओं के बीच हुई झड़प मामले में बड़े ही गुपचुप तरीके से आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया लेकिन FIR की कॉपी किसी को नहीं बताई। मीडिया से लेकर कांग्रेस नेता तक इसका पता करते रहे और जब पुलिस की खामोशी पर संदेह हुआ तो एसपी दफ्तर का घेराव कर लिया गया। चर्चा यह है कि पुलिस ने FIR क्यों छुपाई? क्या गुपचुप तरीके से आलोक मिश्रा और चिंटू चौकसे के नाम के अलावा और भी नाम शामिल कर गिरफ्तारी भी कर ली जाएगी? Why did the police conceal the FIR? Will other names also be included, and will arrests be made quietly?
उल्लेखनीय है कि प्रदर्शन के फुटेज में देखा जा रहा है कि कांग्रेस नेता आलोक मिश्रा और कोतवाली थाना प्रभारी मानस द्विवेदी के बीच में झड़प हुई। इस दौरान दोनों ने एक-दूसरे की कॉलर पकड़ ली। मौके पर मौजूद पुलिस का कहना था कि उन्हें प्रदर्शन की जानकारी नहीं थी। अचानक से सड़क जाम होने की स्थिति बनी, इसलिए कांग्रेसियों को मौके से हटाया जा रहा था। इसी दौरान कोतवाली पुलिस प्रभारी मानस द्विवेदी ने कांग्रेसियों को उठाने की कोशिश की। यह घटना झूमाझटकी में बदल गई। पुलिस ने मानस द्विवेदी की ओर से आलोक मिश्रा, चिंटू चौकसे और एक अन्य कांग्रेसी के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने का मुकदमा दर्ज करवा दिया। इसके विरोध में जबलपुर में कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय का घेराव किया। एडिशनल एसपी डॉ. आयुष जाखड़ का कहना है "कांग्रेस नेताओं की बात भी सुनी गई है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी, जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
