सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पुलिस कमिश्नर ने कराई विभाग की जांच, जारी किया कार्रवाई का अंतिम आदेश जारी - khabarupdateindia

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Thursday, 13 August 2026

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पुलिस कमिश्नर ने कराई विभाग की जांच, जारी किया कार्रवाई का अंतिम आदेश जारी



रफीक खान
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश पुलिस की कार्य प्रणाली पर गंभीर प्रहार करते हुए 4 पुलिस निरीक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिपालन में इंदौर के पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह द्वारा चारों पुलिस निरीक्षकों की विभागीय जांच कर उन्हें दोषी मानते हुए अंतिम दंडात्मक आदेश जारी कर दिया है। इस आदेश के तहत पुलिस इंस्पेक्टर्स के जहां तीन में से एक-एक स्टार छीन लिए गए। उनका डिमोशन करते हुए उन्हें फील्ड तथा विवेचना जैसे जिम्मेदारी के महत्वपूर्ण कार्यों से भी वंचित कर दिया गया है। कार्रवाई से पुलिस विभाग के लापरवाह कर्मचारियों अधिकारियों में हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई। Acting on a Supreme Court order, the Police Commissioner conducted a departmental inquiry and issued a final order for action.

जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि फर्जी/एक जैसे गवाहों (पॉकेट विटनेस) के इस्तेमाल के मामलों की जांच के बाद इंदौर में चार थाना प्रभारियों (TI) पर कड़ी विभागीय कार्रवाई की गई है। मामलों में गड़बड़ी पाए जाने पर खजराना और विजय नगर के तत्कालीन टीआई को डिमोट किया गया है, जबकि चंदन नगर और एमआईजी (MIG) थाने के अधिकारियों पर भी गाज गिरी है। पुलिस इंस्पेक्टर दिनेश वर्मा (खजराना थाना): लगभग 700 मामलों (जुआ, सट्टा और आर्म्स एक्ट) में एक जैसे दो गवाहों (इरशाद और नवीन) का बार-बार इस्तेमाल साबित होने पर, इन्हें टीआई पद से डिमोट करके सब-इंस्पेक्टर (SI) बना दिया गया है। इंद्रमणि पटेल (चंदन नगर थाना): करीब 1,350 मामलों में सिर्फ चार गवाहों के नाम सामने आने और सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बाद इन्हें थाने से हटा दिया गया है। अजय वर्मा (एमआईजी थाना): वर्ष 2022 के एक मामले में समय पर एफआईआर दर्ज न करने और शिकायकर्ता युवती पर ही मामला दर्ज करने के आरोप में इन्हें टीआई से डिमोट कर एसआई बनाया गया है। रवींद्र गुर्जर (विजय नगर थाना): वर्ष 2024 में सट्टा मामलों में नाबालिगों को गलत तरीके से फंसाए जाने के आरोप सिद्ध होने पर इन्हें भी टीआई पद से डिमोट कर एसआई बना दिया गया है।दिनेश वर्मा (पूर्व खजराना टीआई): इन्हें हाल ही में विभागीय जांच पूरी होने के बाद तीन साल के लिए डिमोट कर सब-इनस्पेक्टर (SI) बना दिया गया है। इंद्रमणि पटेल (पूर्व चंदन नगर टीआई): सुप्रीम कोर्ट की सख्त हिदायत के बाद इन्हें पुलिसिंग और विवेचना (investigation) के सभी कार्यों से पूरी तरह अलग कर दिया गया।