रफीक खान
मध्य प्रदेश के रीवा में पदस्थ लोक निर्माण विभाग के प्रभारी मुख्य अभियंता यानी कि चीफ इंजीनियर को ₹50000 की रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त पुलिस की टीम ने दबोच लिया। चीफ इंजीनियर द्वारा यह रिश्वत क्वालिटी कंट्रोल की एक एजेंसी के मैनेजर से उनकी फर्म को काम दिलाने के बदले मांगी गई थी। ₹100000 में डील तय हुई और उसकी ₹50000 की किस्त देने के दौरान घूसखोर को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। ट्रैप की यह कार्रवाई सिविल लाइन अटल पार्क के सामने स्थित उसके शासकीय आवास पर की गई। Action taken at the government bungalow opposite Atal Park in Civil Lines; ₹1 lakh demanded in exchange for securing work.
जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि शिकायतकर्ता सोनू सिंह सतना की एक टेस्टिंग लैब में मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। उनकी फर्म लोक निर्माण विभाग के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता परीक्षण का काम करती है। आरोप है कि रीवा लोक निर्माण विभाग संभाग में काम दिलाने के एवज में प्रभारी मुख्य अभियंता कैलाश कुमार लच्छे द्वारा हर महीने ₹1 लाख रिश्वत की मांग की जा रही थी। शिकायतकर्ता ने 4 अगस्त को शिकायत दर्ज कराई थी। सत्यापन के दौरान भी आरोपी द्वारा अपने कथित सहयोगी धर्मवीर भारती की मदद से ₹50 हजार की राशि ली गई थी। इसके बाद लोकायुक्त पुलिस ने मंगलवार को ट्रैप की कार्रवाई करते हुए कैलाश कुमार लच्छे को शिकायतकर्ता से ₹50 हजार लेते हुए पकड़ लिया। आरोपी कैलाश कुमार लच्छे वर्तमान में प्रभारी मुख्य अभियंता, लोक निर्माण विभाग संभाग रीवा के पद पर पदस्थ हैं और उनका मूल पद कार्यपालन यंत्री, लोक निर्माण विभाग जिला रीवा बताया गया है।लोकायुक्त पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया है।
