रफीक खान
भारत के सांप्रदायिक सौहाद्र को खंडित करने के लिए सदियों से साजिश रची जाती रही है लेकिन मोहब्बत की जीत हमेशा दर्ज होती चली आ रही है। जब तब ऐसे मामले सामने आते रहते हैं, जो साबित करते हैं कि नफरत से कहीं बहुत ज्यादा ताकतवर मोहब्बत है। सावन के महीने में उत्तर प्रदेश के मेरठ के कावड़ियों की पूरी दुनिया में जय जयकार हो रही है। हजारों लोगों की भीड़ वाली कावड़ यात्रा ने एक जनाजे को रास्ता देने के लिए खुद को रोक दिया। मेरठ- दिल्ली हाईवे से जब तक जनाजे की पूरी भीड़ क्रॉस नहीं हो गई, कावड़ यात्री वही थमे रहे। इस पूरे नजारे की फोटो और वीडियो पर हर कोई कांवड़ियों को सेल्यूट कर रहा है। सनातनियों और इंसानियत की इस मिसाल को खूब सराहा जा रहा है। Love remains far more powerful than hate; Kanwariyas are being praised across the globe on social media.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कहा जाता है कि उत्तर प्रदेश के मेरठ में दिल्ली-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग पर कांवड़ यात्रा के दौरान शिवभक्तों ने इंसानियत और सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल पेश की है। मेरठ जिले के दौराला थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सिवाया गांव के पास दिल्ली-देहरादून हाईवे (NH-58), 9 अगस्त 2026 को यह घटना घटी। सिवाया गांव के 40 वर्षीय निजाम का दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ने से निधन हो गया था। उनका परिवार उन्हें सुपुर्द-ए-खाक करने के लिए जनाजा लेकर कब्रिस्तान जा रहा था, जो हाईवे के दूसरी तरफ स्थित है। हाईवे पर कांवड़ियों का भारी जनसैलाब था। स्थिति को भांपते हुए शिवभक्त कांवड़िए खुद आगे आए, उन्होंने डीजे बंद करा दिए और मानव श्रृंखला बनाकर जनाजे को सुरक्षित रास्ता दिया।
