दलील: 5 साल से नागपुर में रह रहा हूं, जबलपुर का सारा कारोबार बेटे फहीम खान के नाम पर, कोई भागीदारी नहीं - khabarupdateindia

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Sunday, 27 September 2026

दलील: 5 साल से नागपुर में रह रहा हूं, जबलपुर का सारा कारोबार बेटे फहीम खान के नाम पर, कोई भागीदारी नहीं


रफीक खान
मध्य प्रदेश के जबलपुर में अधारताल थाना अंतर्गत खजरी खिरिया बाईपास पर स्थित कबाड़ खाने में 2 साल पहले हुए बहुचर्चित धमाकों के मामले में मोहम्मद शमीम खान उर्फ शमीम कबाड़ी पर दर्ज एफआईआर हाई कोर्ट ने रद्द कर दी है। आरोपी बनाए गए मोहम्मद शमीम की ओर से पेश की गई याचिका में बताया गया कि वह 5 साल से नागपुर में रह रहा है। जबलपुर में चल रहे कारोबार का पूरा स्वामित्व उसके बेटे मोहम्मद फहीम खान का है। इस कारोबार में किसी भी तरह की कोई भागीदारी शमीम खान की नहीं है। ऐसी स्थिति में किसी भी घटना का जिम्मेदार उसे कैसे ठहराया जा सकता है? Argument: I have been living in Nagpur for five years; the entire Jabalpur business is in the name of my son, Fahim Khan; I have no partnership in it.

उल्लेखनीय है कि 25 अप्रैल 2024 को खजरी खिरिया स्थित रजा मेटल इंडस्ट्रीज के स्क्रैप यार्ड में एक के बाद एक कई धमाके हुए थे। इस घटना में भोलाराम भूमिया और मोहम्मद खलील की मौत हो गई थी, जबकि कुछ अन्य लोग घायल हुए थे। पुलिस जांच के अलावा फैक्ट्री प्रबंधन इंटेलिजेंस ब्यूरो ने भी यार्ड का निरीक्षण किया था। उस समय की जांच पड़ताल में लॉन्ग प्रूफ रेंज खमरिया से लाया गया डिमोलिश किया गया गोला बारूद सामग्री भी मौके पर मौजूद होना रेखांकित किया गया था। जिन भी परिस्थितियों में धमाके हुए और घटना हुई उस पर खबरें नेशनल मीडिया में खूब सुर्खियों में रही। मोहम्मद शमीम ने वकील सुनील कुमार पांडे के माध्यम से तमाम तरह के तथ्य हाई कोर्ट में प्रस्तुत किए। हाई कोर्ट के जस्टिस हिमांशु जोशी द्वारा संपूर्ण सुनवाई के बाद पारित आदेश में कहा गया कि यह न्यायालय घटना की गंभीर प्रकृति और दो लोगों की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु से अवगत है। हालांकि, अपराध की गंभीरता इस आवश्यकता को समाप्त नहीं कर सकती कि संबंधित आरोपी को कथित आपराधिक कृत्यों से जोड़ने वाली ठोस और आधारभूत सामग्री मौजूद हो। वर्तमान मामले में गवाहों की विश्वसनीयता का मूल्यांकन करना आवश्यक नहीं है। रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री पर केवल यह निर्धारित करने के लिए विचार किया जा रहा है कि याचिकाकर्ता के विरुद्ध कथित अपराधों के मूलभूत तत्व सामने आते हैं या नहीं। इस विचार के आधार पर न्यायालय पाता है कि ऐसी आवश्यक आधारभूत सामग्री अनुपस्थित है। उपरोक्त चर्चा के मद्देनजर इस न्यायालय का मत है कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री से वर्तमान याचिकाकर्ता के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 304, 120-B और 212 अथवा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 की धाराओं 3 और 5 के आवश्यक मूलभूत तत्व सामने नहीं आते हैं। ऐसी कोई पर्याप्त सामग्री उपलब्ध नहीं है, जिससे यह प्रदर्शित हो कि याचिकाकर्ता की विस्फोट कराने में कोई भूमिका थी, कथित विस्फोटक पदार्थ पर उसका कब्जा या नियंत्रण था, वह किसी आपराधिक साजिश में शामिल था अथवा उसने किसी अपराधी को आश्रय दिया था। अतः उसके विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।परिणामस्वरूप, याचिका स्वीकार की जाती है। थाना अधारताल, जिला जबलपुर में दर्ज अपराध क्रमांक 513/2024, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धाराओं 304, 120-B और 212 तथा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 की धाराओं 3 और 5 के तहत अपराध दर्ज किया गया था, उससे उत्पन्न आपराधिक कार्यवाही को वर्तमान याचिकाकर्ता मोहम्मद शमीम खान के संबंध में निरस्त (quashed) किया जाता है। यह आदेश केवल याचिकाकर्ता मोहम्मद शमीम खान तक सीमित रहेगा और कानून के अनुसार किसी अन्य आरोपी के संबंध में चल रही जांच, अभियोजन अथवा मुकदमे को प्रभावित नहीं करेगा।