रफीक खान
मध्य प्रदेश के उज्जैन में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के रोड शो के दौरान महापौर मुकेश टटवाल को बेज्जती का सामना करना पड़ा। चलते रथ से पुलिस अधीक्षक ने उन्हें उतार दिया। महापौर को सूची का हवाला देते हुए बताया गया कि रथ में सवार होने वालों में उनका नाम नहीं है। अपनी ही पार्टी के कार्यक्रम में इस तरह के बर्ताव से न सिर्फ महापौर बल्कि उनके समर्थक भी खासे नाराज है। अंदरूनी गुटबाजी के चलते मामले ने तूल पकड़ लिया है और महापौर ने 20 सितंबर को विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दे दी है। संत बालीनाथ मंदिर बाघपुर में बैरवा समाज की बैठक हुई और इसमें टटवाल के साथ हुए अभद्र व्यवहार की तीव्र निंदा की गई। Mayor facing humiliation within his own party; SP cites list and warns of protest on September 20.
उज्जैन के प्रथम नागरिक के रूप में महापौर टटवाल अगवानी से लेकर हर जगह आगे होना चाहिए थे लेकिन उन्हें अपेक्षा और अभद्रता का सामना करना पड़ा। भाजपा जिला प्रभारी बजरंग पुरोहित और कार्यक्रम प्रभारी जयपाल सिंह चावड़ा ने उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ रथ में चढ़ने का को कहा गया था। इसके बावजूद उन्हें उतार दिया गया। हेलीपैड से रथ पर सवार होने वाले नेताओं की सूची में महापौर का नाम ही नहीं था। महापौर सवाल करते रहे लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से लेकर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक अनिल जैन कालूखेड़ा और नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल भी सब कुछ चुपचाप देखते रहे। किसी ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया। पार्टी के भीतर गुटबाजी या फिर किसी समाज विशेष के जनप्रतिनिधि के साथ इस तरह का व्यवहार भारतीय जनता पार्टी में जमकर का विषय बना हुआ है। अब 20 सितंबर को कैसा विरोध और प्रदर्शन होगा यह देखने वाली बात है।
