
रफीक खान
मध्य प्रदेश पुलिस की एसटीएफ ने राजधानी भोपाल स्थित बौद्ध मठ के एक ही पते पर बने पासपोर्ट को संदिग्ध मानकर जांच शुरू कर दी है। भोपाल तथा ग्वालियर के डाबरा के पतों को दर्शाकर बनाए गए 70 पासपोर्ट्स को संदिग्ध माना गया है। इस मामले में रियाल चौधरी तथा विप्लव अधिकारी से सघन पूछताछ कर जानकारी जुटाई जा रही है। रियाल चौधरी खुद को असम के कामरूप जिले के आसपास का रहने वाला बता रहा है। वहीं विप्लव अधिकारी खुद को कोलकाता में एक नेटवर्क की जानकारी देते हुए पुलिस को फिलहाल गुमराह कर रहा है वह कोलकाता से मध्य प्रदेश कैसे पहुंच गया? इस तरह की अनेक बिंदुओं पर पड़ताल चल रही है। महाराष्ट्र के उल्हासनगर से प्रियांशु चौधरी तथा नागपुर से जय चौधरी को बिना वेरिफिकेशन के अनुशंसा करने वाले डबरा के तत्कालीन थाना प्रभारी विनायक शुक्ला भी संदेह के कटघरे में है। STF receives information regarding the issuance of over 70 suspicious passports; former Dabra TI questioned.
जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि राजधानी भोपाल के गोविंदपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत अन्ना नगर स्थित एक बौद्ध मठ के एक ही पते पर जारी किए गए 40 पासपोर्ट की जानकारी जताने के बाद एसटीएफ अतिसक्रिय मोड पर आ गई है। कथित तौर पर बांग्लादेश से आए लोगों के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें भारतीय पहचान दिलाने में इस तरह से जारी कराए गए पासपोर्ट काफी मददगार साबित हो रहे हैं। इन लोगों के आधार कार्ड, पैन कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज तैयार कराए गए। बाद में इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पते से पासपोर्ट बनवाए गए। डबरा के बौद्ध विहार के पते से भी पासपोर्ट जांच में सामने आया है कि डबरा स्थित एक बौद्ध विहार के पते का इस्तेमाल भी पासपोर्ट बनवाने के लिए किया गया। इस पते से करीब 30 लोगों के पासपोर्ट जारी होने की जानकारी मिली है। एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन लोगों का विहार से वास्तविक संबंध था या सिर्फ दस्तावेजों में इस पते का इस्तेमाल किया गया। मामले का नेटवर्क कहां से शुरू हुआ है और कहां तक पहुंचा है यह सब कड़ियां जोड़ने में जांच टीम लगी हुई है।