रफीक खान
मध्य प्रदेश कैडर में वर्ष 2011 की महिला आईएएस अधिकारी नेहा मारव्या एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। राज्य सरकार द्वारा दो दिन पूर्व किए गए तबादले को महिला अधिकारी ने प्रेस्टीज इशू बनाते हुए व्हाट्सएप ग्रुप में पोस्ट डाल दी है। इसके बाद एक नई बहस और चर्चा स्वाभाविक तौर पर शुरू हो गई है। नेहा का विवादों से पुराना नाता रहा है और यह पहला अवसर नहीं है, जब उनका दर्द छलका हो, इसके पूर्व भी वे हमेशा सरकार द्वारा किए गए एक्शन के खिलाफ मुखर हुई है। राजनेताओं को थप्पड़ मारने से लेकर कर्मचारी और अधिकारियों से बदसलूकी का इलजाम हमेशा लगता रहा है। प्रदेश में 400 के लगभग आईएएस अधिकारियों में 60 महिला अधिकारी है। नेहा ही विवाद में क्यों घिरती है? सिविल सेवा के किसी अफसर पर एक ही तरह के आरोप भी आईएएस बिरादरी में चिंता का विषय बना हुआ है और इस वजह से आईएएस एसोसिएशन भी पशोपेश की स्थिति में नजर आ रहा है। The association, too, is in a quandary; it has a deep-rooted connection with controversies. This is not the first time such anguish has surfaced—this has been the recurring pattern following every action.
जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि सीनियर आईएएस अधिकारी नेहा मारव्या ने ग्रुप में पोस्ट डाला, उसमें लिखा कि मैं ट्रांसफर की सूची देखकर बहुत परेशान हूं। पांच सितंबर को आई सूची में मेरा भी नाम है, जबकि मुझे ज्वाइन किए 50 दिन ही हुए हैं। इसे देखकर मैं विचलित हूं। यह एक साल में चौथी बार है, जब मेरा नाम ट्रांसफर सूची में आया है। मैं समझती हूं कि एमपी आईएएस एसोसिएशन का ग्रुप सिर्फ बर्थडे विश करने और बधाई देने कि लिए हैं।उन्होंने आगे लिखा कि मैं यहां अपनी नाराजगी जाहिर करना चाहती हूं और उम्मीद करती हूं कि मुझे कोई समाधान मिलेगा। मैं अच्छी तरह से समझती हूं कि एक आईएएस अधिकारी के तौर पर, राज्य सरकार जहां चाहे, वह मुझसे ड्यूटी करने के लिए कह सकती है और मैंने हमेशा सम्मान के साथ इन आदेशों को स्वीकार किया हूं। आईएएस नेहा मारव्या ने लिखा कि मैं इस बार बहुत निराश हूं। मेरा ट्रांसफर इसलिए कर दिया गया क्योंकि जिन कर्मचारियों का काम सीधे मेरे अधीन नहीं बल्कि विभाग के अधीन है, उन्होंने मेरे खिलाफ बगावत कर दी, वे मेरी मेज पर हाथ पटककर तबादला करवाने की धमकी दे रहे थे। मैंने सही प्रक्रिया के जरिए उनके अनुशासनहीन होने, फाइलें दबाकर रखने और विभाग में मेरे साथ किए गए बुरे बर्ताव की शिकायत की थी, ताकि जरूरी कार्रवाई हो सके। लेकिन इसके बजाय, मेरा ही तबादला कर दिया गया।उन्होंने लिखा कि इससे क्या संदेश जाएगा। क्या एक आईएएस अधिकारी इतना कमजोर होता है कि उसके मताहत कर्मचारी बगावत करके उसका तबादला करवा सकते हैं। मैंने ऐसा क्या कि एक महीने के अंदर ही मताहतों ने बगावत कर दी। मेरी बात छोड़िए, मुझे नहीं लगता कि कोई आईएएस अधिकारी ऐसा कुछ कर सकता है, जिससे ज्वाइन करने के एक महीने के भीतर की बगावत कर दें। एक महीने में तो अधिकारी काम को ठीक से समझ भी नहीं पाता। लेकिन मताहतों की बगावत के कारण हुए इस तबादले से मुझे अपमानित होना पड़ा है।नेहा मारव्या ने कहा कि मैं कैसे काम करूं। मेरा कार्यकाल सिर्फ 2-3 महीने का होता है, जब तक मैं अपनी जिम्मेदारी को ठीक से समझ पाती हूं, तब तक मेरा तबादला हो जाता है। मेरे नीचे काम करने वाले लोग भी मुझे आसान शिकार समझते हैं, अगर मैं उनकी मर्जी से काम न करूं तो वे मेरा तबादला करवा सकते हैं। मैंने कई सालों तक खामोशी और सब्र से काम लिया, मुझे दरकिनार किया गया और कोई काम नहीं दिया गया। इस उम्मीद में कि हालात सुधरेंगे, लेकिन स्थिति औऱ बिगड़ गई। अब मेरे नीचे काम करने वाले लोग मुझे धमकाने लगे हैं। पत्र के अंत में लिखा कि हमेशा साजिश करने वाले ही जीतते हैं और मैं हार जाती हूं। सिस्टम ने मुझे निराश किया है। आज मेरी बारी है, कल कोई और आईएएस अफसर शिकार बनेगा। यह पत्र पूरे मामले का एक पक्ष है लेकिन दूसरा पक्ष और गंभीर है। दूसरा पक्ष यह है कि शासन और प्रशासन में बैठे लोग यह मानते हैं कि अगर सरकार महिला अधिकारी से कोई द्वेष रखती होती तो बड़ा और सख्त एक्शन लेती, सिर्फ उस पद से हटाने का नहीं। बार-बार वही स्थिति बनना आत्ममंथन का विषय होना चाहिए।
