₹90 हजार में उमरा और 5. 90 लाख में हज, जमकर लूटा जा रहा है हज यात्री, स्कैम की शिकायत सऊदी तक पहुंची - khabarupdateindia

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Saturday, 5 September 2026

₹90 हजार में उमरा और 5. 90 लाख में हज, जमकर लूटा जा रहा है हज यात्री, स्कैम की शिकायत सऊदी तक पहुंची


रफीक खान
राम मंदिर में चंदा चोरी और घोटाले के बाद अब हज यात्रा के मामले में बड़ा स्कैम आरोपित हुआ है। मामला बहुत गंभीर है और भारत सरकार से लेकर सऊदी अरब तक इसकी शिकायत व गूंज हो चुकी है। भारत से जाने वाले करीब सवा लाख हज यात्रियों को तमाम तरह की सर्विस प्रोवाइड करने के टेंडर में यह गड़बड़ी रेखांकित की गई है। ऑनलाइन टेंडर को ड्यू डेट के पहले ही ऑफलाइन किया गया। 86 सर्विस प्रोवाइडर्स में से तीन सर्विस प्रोवाइडर्स को सिलेक्ट किया और उनमें सबसे कम दर पर सेवा प्रदान करने वाली कंपनी को अप्रूव कर लिया गया। अचानक खेल हुआ कि 3 साल से लगातार सेवा देने वाली जिस इत्रा अल खैर कंपनी को सऊदी सरकार ने पेनल्टी लगाई थी और वर्तमान टेंडरिंग में जिसकी राशि सर्वाधिक 9777 रियल सऊदी रियाल प्रति हज यात्री भरी गई, उसे ही टेंडर दे दिया गया। जहां लोएस्ट प्राइज को टेंडर मिलना था, वहां हाईएस्ट प्राइस को टेंडर दे दिया गया। इस पूरी दोषपूर्ण प्रक्रिया को लेकर करीब 4,017 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भोज हज यात्रियों पर आरोपित है। जिसे लेकर भारत सरकार के सभी संबंधित विभाग कटघरे में आ गए हैं। Umrah for ₹90,000 and Hajj for ₹5.90 lakh—Hajj pilgrims are being blatantly fleeced; complaints regarding the scam have reached Saudi Arabia.

रिपोर्ट्स और अन्य जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि हज यात्रा में भारत से करीब सवा लाख यात्री जाते हैं। हज यात्रा के इंतजामों का काम मुख्य रूप से भारत सरकार का अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय करता है। इसमें केंद्रीय गृह मंत्रालय तथा विदेश मंत्रालय की सहभागिता भी लगभग बराबर की होती है। वर्ष 2027 में हज यात्रियों की सुविधाओं के लिए सर्विस प्रोवाइडर का चयन करने ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई। यह प्रक्रिया 11 से 22 अगस्त तक चलना थी, लेकिन आरोपित है कि इसे बीच में ही ब्रेक कर दिया गया। ऑफलाइन प्रक्रिया शुरू हुई और तीन कंपनियों को चिन्हित किया गया। इनमें सबसे कम राशि में सर्विस प्रदान करने वाली कंपनी मशरीक अल मुतमैज़ा ने 8,717 सऊदी रियाल में हामी भरी। जबकि मशरीक अल माशायक ने ₹9,721 सऊदी रियाल तथा सर्वाधिक राशि वसूलती चली आ रही इत्रा अल खैर द्वारा 9,777 सऊदी रियाल की दर प्रस्तुत की। चिन्हित कंपनियों में से टेंडर इवेलुएशन कमेटी TEC में हज कमेटी के सीईओ आईएएस शाहनवाज चंदम कुझिईल, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय के डिप्टी सेक्रेटरी आईएएस श्रवण जातवथ, रियाद स्थित भारतीय दूतावास के फर्स्ट सेक्रेटरी आईएफएस ऋषि त्रिपाठी, जेद्दा हज काउंसलेट के आईएफएस सदफ चौधरी तथा काउंसिल जनरल आईएफएस फहद खान सूरी द्वारा सबसे कम डर प्रस्तुत करने वाली कंपनी मशरीक अल मुतमायज़ा को सिलेक्ट और अप्रूव कर दिया गया। इस स्टेज के बाद पूरा खेल हुआ और सबसे लोएस्ट दर भरने वाली कंपनी को खारिज करते हुए हाईएस्ट दर भरने वाली इस कंपनी को टेंडर दे दिया गया, जो खराब सुविधाओं और भ्रष्टाचार के लिए लगातार 3 साल से बदनाम चली आ रही है। सर्विस प्रोवाइडर्स को यह राशि सरकार नहीं बल्कि हज यात्रियों द्वारा जमा की जाने वाली फीस में से ही दी जाती है। हज यात्रियों की जेब पर यह अतिरिक्त डाका क्यों डाला गया? यह सिस्टम ही बता सकता है। एक बात बिल्कुल साफ है कि जब आमतौर पर उमरा 90 हजार रुपए में हो जाता है तो फिर हज के लिए 5 लाख 90 हजार या उससे भी अधिक राशि क्यों वसूली जाती है?

पिछले साल ऐसे भी लुटा था

आरोपित है कि जिस सर्विस प्रोवाइडर्स को इस बार फिर ठेका दे दिया गया है, पिछली बार उसने हज यात्रियों को जीपीएस युक्त घड़ी बेची थी। ₹300 से ₹400 की चाइनीस प्रोडक्ट घड़ी 5 से ₹10000 तक हज यात्रियों को दी गई। नतीजा यह रहा कि वह एक दिन भी नहीं चल पाई और आधे घंटे के भीतर ही उसकी बैटरी डिस्चार्ज हो गई। जिससे घड़ियों को कचरे की टोकरी में फेंकना पड़ा। इसके अलावा यह भी खबर है कि ठेका पाने वाली इस कंपनी की कार्य प्रणाली और सर्विस क्वालिटी को काफी घटिया मानते हुए सऊदी अरब सरकार ने 100 करोड रुपए की पेनल्टी भी लगाई थी।

 कहीं और से तो नहीं जुड़े तार 

 इस कंपनी के जो प्रोपराइटर और डायरेक्टर हैं, उनके नाम में खान और सिंधी लिखा हुआ है। इससे यह स्पष्ट होता है कि वह अरबियन नहीं है क्योंकि अरब सिटीजंस में खान और सिंधी जैसी सरनेम नहीं आते हैं। ज्यादातर यह सरनेम भारत और पाकिस्तान में ही प्रचलित है। अगर जांच पड़ताल में डायरेक्टर्स या प्रोपराइटर पाकिस्तान के निकले तो मामला और गंभीर हो जाएगा।