चर्चित मामले में वीडियो से ब्लैकमेल करने और धर्म परिवर्तन के दबाव का आरोप भी नहीं आया काम - khabarupdateindia

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Sunday, 1 November 2026

चर्चित मामले में वीडियो से ब्लैकमेल करने और धर्म परिवर्तन के दबाव का आरोप भी नहीं आया काम


रफीक खान
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की एकल पीठ ने एक सीनियर एडवोकेट पर महिला वकील द्वारा लगाए गए यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग और धर्म परिवर्तन के दबाव के आरोप को सिरे से खारिज कर दिया। सीनियर एडवोकेट को अग्रिम जमानत का लाभ देते हुए हाईकोर्ट की एकल पीठ ने कहा कि आपसी सहमति से बनाए गए संबंधों को यौन शोषण नहीं माना जा सकता। दोनों परिस्थितियां अलग-अलग होती है। हाई कोर्ट के इस आदेश और टिप्पणी को न्याय जगत में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। In the high-profile case, the allegations of blackmailing via video and pressuring for religious conversion also proved ineffective.

जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि छतरपुर के सीनियर एडवोकेट इम्तियाज अहमद सिद्दीकी पर 32 वर्षीय महिला अधिवक्ता ने आरोप लगाया था कि वह 2024 से सीनियर के संपर्क में रही है। पहली बार बनाए गए संबंधों का सीनियर द्वारा वीडियो तैयार कर उसे ब्लैकमेल किया जाता रहा। उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव भी बनाया गया। यौन शोषण की शिकायत पर 3 अगस्त 2026 को बीएनएस की धारा 69 और 351(3), अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम तथा मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 3/5 के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मामले पर सीनियर एडवोकेट द्वारा मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत का आवेदन लगाया गया। हाई कोर्ट के जस्टिस देवनारायण मिश्रा ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि पीड़िता ने 3 अगस्त 2026 तक कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई। 26 फरवरी 2026 को शपथ पत्र और 20 जुलाई 2026 को लिव इन रिलेशनशिप का एग्रीमेंट भी निष्पादित किया गया। प्रथम दृश्ट्या यह दस्तावेज साबित करते हैं कि यहां जोर जबरदस्ती का कोई मामला नहीं है। दोनों का आपसी सहमति से पूरा मामला चल रहा था, ऐसी स्थिति में पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोप स्वीकार करने योग्य नहीं है।